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नारायण दत्त तिवारी ने उत्तराखंड से लड़ा आखिरी चुनाव, रिकॉर्ड मतों से जीते थे एनडी

Fri, 19 Oct 2018 09:10 AM IST
जितेंद्र पपनै, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)
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पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने आखिरी चुनाव उत्तराखंड से लड़ा था। वह उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने रामनगर से उपचुनाव लड़ा था। उनके लिए तत्कालीन कांग्रेस विधायक योगंबर सिंह रावत ने सीट छोड़ी थी। जनता ने उन्हें हाथों हाथ लेते हुए रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाया था।   

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उत्तराखंड में वर्ष 2002 में पहली निर्वाचित सरकार कांग्रेस की बनी। कांग्रेस आलाकमान ने तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया, जबकि वह विधायक नहीं थे। इसलिए उन्हें छह माह में चुनाव जीतना था। रामनगर से कांग्रेस विधायक बने योगंबर सिंह रावत ने उनके लिए सीट छोड़ दी तो मुख्यमंत्री रहते तिवारी ने यहीं से उपचुनाव लड़ा। लेकिन, वह नामांकन वाले दिन ही यहां आए थे। उसी दिन उन्होंने एमपी हिंदू इंटर कॉलेज के मैदान में जनसभा को संबोधित किया।

उन्होंने मंच से जनता से पूछा कि क्या वह चुनाव प्रचार करने यहां आएं। इस पर जनता ने हाथ उठाकर उन्हें बिना शर्त जिताने का विश्वास दिलाया। तिवारी ने 75 प्रतिशत से अधिक मत हासिल कर रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा प्रत्याशी महज ढाई हजार मत ही हासिल कर पाए थे। चुनाव जीतने के बाद तिवारी जनाकांक्षाओं पर खरे उतरे और उन्होंने कई विकास कार्य कराए।      

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रामनगर को एजुकेशनल हब बनाना चाहते थे

पूर्व सीएम एनडी तिवारी रामनगर को एजुकेशनल हब बनाना चाहते थे। एनडी तिवारी को पहाड़ से काफी लगाव था। वह इसी लगाव के चलते समय-समय पर यहां पर विकास कार्य करते थे। एजुकेशनल हब बनाने के लिए एनडी तिवारी ने रामनगर में डिग्री कॉलेज को शासकीय कराया। केंद्र में उद्योग मंत्री रहते 1986 में इलेक्ट्रॉनिक सेवा एवं प्रशिक्षण केंद्र कानिया की स्थापना की, जबकि यह प्रशिक्षण केंद्र दक्षिण भारत में खुल रहा था। यहां उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामदत्त जोशी राजकीय संयुक्त चिकित्सालय, दवा फैक्ट्री आईएमपीसीएल मोहान, तहसील परिसर, सिविल कोर्ट, दाबका, गर्जिया मंदिर, मालधन क्षेत्र में पुलों का निर्माण कराया। गांवों तक सड़कों का जाल बिछाया। ट्रांसपोर्टनगर, ऑडिटोरियम, नगर पालिका का सामुदायिक भवन बनवाया।  

छात्रों हितों के लिए तत्पर रहते थे 
रामनगर (नैनीताल)। एनडी तिवारी छात्रनेताओं की मांग भी पूरी कर देते थे। वर्ष 1978 में वन बचाने को लेकर वनों के ठेके बंद करने के लिए छात्र आंदोलित थे। इस दौरान नैनीताल क्लब में आगजनी हो गई और पुलिस ने लाठीचार्ज कर कई आपराधिक धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे। डीएसबी परिसर नैनीताल के तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष भगीरथ लाल चौधरी सहित 13 छात्र नेताओं पर मुकदमे थे। उस समय तिवारी नेता प्रतिपक्ष थे। उन्होंने मुख्यमंत्री वीपी सिंह से कहकर छात्र हितों को देखते हुए मुकदमे वापस करा दिए थे।  
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