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ND Tiwari Death Anniversary: बचपन से गरीबी देखी लेकिन नहीं मानी हार, संघर्ष कर बने थे विकास पुरुष

Sun, 18 Oct 2020 09:54 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/ हल्द्वानी

सार

  • एसटीएच को एम्स की तर्ज पर विकसित करना चाहते थे एनडी 
  • बेरोजगारों को रोजगार देने और पलायन रोकने के लिए कराई थी कुमाऊं में उद्योगों की स्थापना
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एनडी तिवारी - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पहाड़ पर ही नहीं यूपी में भी विकास की बयार बहा देने वाले और यूपी एवं उत्तराखंड दो राज्यों के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी का एक और जन्म दिन एवं पुण्य तिथि 18 अक्तूबर को निकल गई। बल्यूटी गांव में अपने ननिहाल में जन्मे नरैण (एनडी) ने बचपन में गरीबी देखी और जब बड़े संघर्षों से शिक्षा हासिल कर उन्होंने राजनीति में पांव जमाए तो गरीबी-बेरोजगारी दूर करने के अपने भगीरथ प्रयत्नों के चलते विकास पुरुष बन गए।

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यूपी के मुख्यमंत्री और केंद्र में उद्योग मंत्री रहते उन्होंने यूपी के साथ उत्तराखंड में उद्योगों का जाल बिछाया। उत्तराखंड में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सिडकुल की सौगात दे हजारों हाथों को रोजगार भी उपलब्ध कराया। 

कुमाऊं वासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें इसके लिए एनडी तिवारी ने सुशीला तिवारी अस्पताल बनवाया। पहाड़ पर डॉक्टरों की भारी कमी थी, डॉक्टरों की नई पौध मिले जो पहाड़ पर सेवा कर सके, इसके लिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना कराई। उनका सपना था कि एसटीएच को एम्स की तर्ज पर विकसित किया जाए।
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अपने उम्र के अंतिम पड़ाव पर होने के बाद भी अपने राजनैतिक शिष्य हरीश रावत से एसटीएच को एम्स की तर्ज पर विकसित करने की मांग पूरी करवाने के लिए वह धरने पर बैठे। तत्कालीन सीएम हरीश रावत के मांगें मानने के आश्वासन के बाद ही स्व. तिवारी ने धरना समाप्त किया था लेकिन चेले का आश्वासन हकीकत में नहीं बदल सका।

पलायन की वजह से दुखी थे तिवारी

कुमाऊं का पिछड़ापन और यहां के युवाओं का पलायन तिवारी जी के अंतर्मन को व्यथित करता था। यहां के युवा हाथों को रोजगार देने के लिए उन्होंने रानीबाग में हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) की स्थापना कराई। घड़ी बनाने के लिए विदेश से मशीन लाकर लगाई गईं। 90 के दशक में फैक्टरी में उत्पादन भी बेहतर हो रहा था और एचएमटी घड़ी की मांग भी अधिक थी। कुछ अलग कारणों से धीरे-धीरे रानीबाग एचएमटी कारखाना रसातल में जाता रहा और इसे उबारने की ओर किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

एचएमटी को बचाने के लिए तिवारी जी ने केंद्र सरकार तक से संपर्क साधा। एचएमटी रानीबाग के बाहर धरने पर भी बैठे मगर, उनकी जैसी संवेदना किसमें होती? उन्होंने लालकुआं में सेंचुरी पेपर मिल की स्थापना कराई थी। पेपर मिल से लोगों को रोजगार मिला और आज भी कई परिवारों के चूल्हे इसी मिल की वजह से जल रहे हैं। इनके अलावा भीमताल और काशीपुर में औद्योगिक आस्थान भी इस इलाके को तिवारी जी की ही देन रहे।

उत्तराखंड राज्य बनाने के साथ यहां के विकास में भी तिवारी जी का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य को विकास पथ पर आगे बढ़ाने की उनकी सोच की बदौलत ही राज्य में आज उद्योगों का जाल दिखाई देता है। एनडी तिवारी जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से उद्योग लगाने की योजना पर काम किया। रुद्रपुर और हरिद्वार में सिडकुल जैसे औद्योगिक आस्थान की स्थापना हुई। स्व. तिवारी के व्यक्तित्व और प्रभाव के कारण ही देश की नामी कंपनियों ने यहां पर कंपनियां खोलीं। हजारों युवाओं को रोजगार मिला। आज कई कंपनियां बंद हो चुकी हैं और लोग रोजगार से हाथ धो चुके हैं।  

पढ़ाई के लिए उधार में रुपये लेकर घर से भागे थे एनडी

एनडी तिवारी ने हाईस्कूल की पढ़ाई सीआरएसटी कॉलेज नैनीताल से की। दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। गरीबी के कारण वह इंटर में दाखिला नहीं ले सके और प्राइवेट विद्यार्थी  के रूप में 1941 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।

घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण उनके पिता पूर्णानंद तिवारी उनको आगे पढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। तिवारी जुलाई 1944 में घर से भागकर प्रयाग चले गए। वहां उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाया। उनके चाचा बच्चीराम ने 50 रुपये देकर घर से भागने में मदद की थी। 

कांग्नेस नेताओं ने दी श्रद्धांजलि 
प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की जयंती व पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री (संगठन) विजय सारस्वत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री तिवारी ने अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड की मजबूती के लिए अनेक कार्य किए थे। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य में विभागों का ढांचा तैयार कर विकास की बुनियाद रखी। 900 करोड़ की वार्षिक योजना का आकार बढ़ाकर 5000 करोड़ तक पहुंचाया। 

राज्य में औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित कर राज्य के बेरोजगार नवयुवकों के लिए रोजगार सृजन करने का काम किया। टिहरी बांध, मनेरी भाली, धौली गंगा जल विद्युत परियोजनाओं का काम पूरा कर राज्य को विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर करने का काम किया। राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अमूल-चूल परिवर्तन कर एलटी के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने का काम किया। 
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एनडी तिवारी ने बहाई थी विकास की गंगा

प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से पूरे देश में एक दर्जन से अधिक ज्वाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्रों के संस्थापक और पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी का जन्मदिन एवं द्वितीय निर्वाण दिवस पर उनको भावपूर्ण स्मरण किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि नारायण दत्त तिवारी ने पहले उत्तर प्रदेश और फिर उत्तराखंड में कई एतिहासिक कार्य किए। 

रविवार को नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में एनडी तिवारी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर नारायण दत्त तिवारी यूथ हॉस्टल की अध्यक्ष दीपा जोशी ने कहा कि नारायण दत्त तिवारी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विकास की जो बुनियाद रखी वह अनंत काल तक चिरस्थाई रहेगी। उनके सपनों को साकार करने के लिए इस संस्था में कंप्यूटर शिक्षा, नर्सरी टीचर ट्रेनिंग, ताइक्वांडो, क्रिकेट और  जिमनास्टिक के साथ ही अनेकों सामाजिक गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। 

पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने कहा कि नारायण दत्त तिवारी ने केंद्रीय उद्योग मंत्री और यूपी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में जो विकास कार्य किए वह हमेशा याद किए जाएंगे। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेहरू युवा केंद्र के केयरटेकर पदम प्रकाश शर्मा ने कहा कि एनडी तिवारी के बाद किसी भी मुख्यमंत्री ने ऐसे ऐतिहासिक काम नहीं किए।
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