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इस शुभ मुहूर्त में करेंगे घट स्थापना तो मिलेगा दोगुना फल, ऐसे करें मां के नौ रूपों को प्रसन्न

Tue, 28 Mar 2017 09:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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आज (मंगलवार से) चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है, इसके पहले दिन सभी मंदिरों में देवी के शैलपुत्री स्वरूप का पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही दुर्गा-सप्तशती के पाठ होंगे। पूरे नवरात्र देवी को अलग-अलग स्वरूपों में सजाया जाएगा।
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नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट-स्थापना की जाएगी।  सामान्य रूप से प्रात: 9.18 मिनट से 1.56 दिन तक किसी भी समय घट-स्थापना की जा सकती है। वहीं विशेष अभिजीत मुहूर्त 11.58 बजे से 12.45 बजे तक रहेगा। श्री राम नवमी पर्व चार अप्रैल को ही मनाना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है।  इस दिन नवमी मध्याह्न व्यापिनी है। 

उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार 28 मार्च को प्रात: 8.20 मिनट से रात 5.40 मिनट तक प्रतिपदा रहेगी। घटस्थापना के लिए द्विस्वभाव लग्न विशेष शुभ होते हैं। मिथुन एवं कन्या लग्न क्रमश: प्रात: 8.26 से 10.40 मिनट तक एवं कन्या लग्न अपराह्न 3.25 से 5.40 मिनट शाम तक रहेगा।
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रंतु कन्या लग्न के समय राहुकाल रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11.58 से 12.45 बजे तक विशेष शुभ रहेगा। डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार राहुकाल 3.28 से 5 बजे तक रहेगा। बताया कि सामान्य रूप से प्रात: 9.18 मिनट से 1.56 दिन तक किसी भी समय घट-स्थापना की जा सकती है। 

देवी के इन स्वरूपों का नवरात्र में होगा पूजन

चार अप्रैल को राम नवमी

इस वर्ष राम नवमी तिथि मध्याह्न व्यापिनी है। अत: राम नवमी व्रत चार अप्रैल मंगलवार को ही ग्राह्य होगा। वामन पुराण में मध्याह्न व्यापिनी नवमी को ही श्री राम नवमी व्रत करना शास्त्र सम्मत बताया गया है। इस वर्ष पुर्नवसु नक्षत्र युक्त होने से इसका विशेष महत्म्य होगा। श्री राम का जन्म पुर्नवसु नक्षत्र मध्याह्न व्यापिनी शुक्ल चैत्र नवमी तिथि में हुआ था। चार अप्रैल को प्रात: 11.10 मिनट पर नवमी प्रारंभ होगी जो कि 5 अप्रैल को प्रात: 9.54 मिनट तक रहेगी। पुनर्वसु नक्षत्र चार अप्रैल को रात 11 बजे तक रहेगा। चार अप्रैल मंगलवार को ही राम नवमी व्रत करना शुभ रहेगा। 

देवी के इन स्वरूपों का नवरात्र में होगा पूजन

प्रथम- शैलपुत्री

द्वितीया- ब्रहमचारिणी

तृतीया- चंद्रघंटा

चतुर्थ- कूष्मांडा

पंचम- स्कंदमाता

षष्ठी- कात्यायनी

सप्तम- कालरात्रि

अष्टम- महागौरी

नवम- सिद्धिदात्री 
 
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ऐसे करें देवी को प्रसन्न


मां शैलपुत्री के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करें। इससे आरोग्य रहने का आशीर्वाद मिलता है

मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाना चाहिए। इससे परिवार के सभी सदस्यों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद मिलता है

मां चंद्रघंटा को दूध से बनी खीर अर्पित करनी चाहिए। इससे दुखों से मुक्ति मिलती है

मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाना चाहिए। इससे बुद्धि का विकास होता है

मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए। इससे शरीर निरोगी रहता है।

मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं। इससे आकर्षण एवं सौंदर्य में वृद्धि होती है। 

मां कालरात्रि- को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाएं। इससे शोक से मुक्ति मिलती है। 

मां महागौरी को नारियल का भोग लगाएं। इससे आत्मशक्ति एवं निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है

मां सिद्धिदात्री को काले तिल का भोग लगाएं। इससे मृत्यु का भय नहीं रहता। 

नव संवत्सर 2074 शुरु
मंगलवार से हिंदुओं के नव संवत्सर की भी शुरुआत हो रही है। विक्रमी संवत 2074 शुरू हो रहा है। इस वर्ष साधारण नाम नया संवत्सर होगा। जो कि वर्ष के लिए अच्छा रहेगा। नवरात्र के पहले दिन से नव वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। नवरात्र के पहले दिन जो दिन पड़ता है, उसको ही वर्ष का राजा माना जाता है। इसके अनुसार वर्ष का राजा मंगल है। वहीं बैसाखी के दिन वाला दिन वर्ष का मंत्री होता है। यानी वर्ष का मंत्री बृहस्पति है। मंगल और बृहस्पति में अच्छे संबंध होने के कारण वर्ष अच्छा माना जा रहा है। हालांकि मंगल की वजह से कुछ घटनाएं, प्राकृतिक आपदाओं आदि का भय बना रहेगा। 
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