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राष्ट्रीय खेल दिवस 2019: प्लास्टिक की गेंद से सफर तय कर अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी बनीं एकता

Thu, 29 Aug 2019 10:39 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अमित उप्रेती, अमर उजाला, अल्मोड़ा
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अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट - फोटो : फाइल फोटो
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कुछ सितारे आसमां पर तो कुछ जमीं पर चमकते हैं और जमीं पर मौजूद इन सितारों के सपने इनके कदमों की तरह आगे ही बढ़ते रहते हैं। ऐसे ही एक होनहार युवा खिलाड़ी हैं अल्मोड़ा के लक्ष्य सेन और अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट । महज 18 साल की छोटी सी उम्र में दुनिया के खिलाड़ियों के बीच 70वें पायदान पर पहुंचे लक्ष्य का सपना वर्ल्ड रैकिंग में पहले स्थान पर पहुंचना है। वहीं अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में नाम कमा चुकीं अल्मोड़ा की एकता बिष्ट भी भारत को अगला वर्ल्ड कप दिलाने को आतुर हैं।

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अल्मोड़ा के हुक्का क्लब निवासी कुंदन सिंह बिष्ट की पुत्री एकता बिष्ट का भी अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटरों में जाना पहचाना नाम है। कभी अल्मोड़ा की गलियों में प्लास्टिक की गेंद से सफर शुरू करने वाली एकता अब महिला भारतीय टीम में शामिल हैं। एकता के कोच लियाकत अली खान ने बताया कि एकता का सपना महिला क्रिकेट में भारत को वर्ल्ड कप जिताना है। पाकिस्तान के खिलाफ एकता का दस ओवर में आठ रन देकर पांच विकेट लेना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। 

एकता की अब तक की उपलब्धि
एकता अब तक 57 वन डे क्रिकेट खेलों में 88 विकेट, एक टेस्ट मैच में तीन विकेट और 40 टी-20 मैच में 50 विकेट विकेट ले चुकी हैं। पहला वनडे और टी-20, 2011 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला। जबकि पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेल चुकी हैं। अक्तूबर 2011 को एकता ने श्रीलंका में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ हेट्रिक बनाई थी। एकता के कोच लियाकत अली ने बताया कि 2017 में उन्होंने महिला वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ 18 रन देकर पांच विकेट लिए। 2017 में उत्तराखंड सरकार ने एकता को खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। 
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लक्ष्य सेन ने कम उम्र में ही काफी उपलब्धियां हासिल कीं

लक्ष्य सेन - फोटो : फाइल फोटो
भारतीय बैडमिंटन जूनियर टीम के कोच रह चुके और वर्तमान में बंगलूरू में प्रकाश पादुकोण एकेडमी में खिलाड़ियों के कोच डीके सेन के छोटे बेटे लक्ष्य ने कम उम्र में ही काफी उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। सात साल की उम्र में लक्ष्य स्टेट टीम में सलेक्ट हो गए थे। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 18 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते कई उपलब्धियां अपने नाम कीं। वर्तमान में बंगलूरू में ट्रेनिंग ले रहे लक्ष्य ने फोन पर बताया कि जल्द ही वह यूरोप के ट्रिप पर जा रहे हैं जहां प्रशिक्षण के बाद बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि उनका अगला लक्ष्य वर्ल्ड रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंचना है।

लक्ष्य की अब तक की उपलब्धि 
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य ने 2019 में जूनियर एशियन चैंपियनशिप जीती। 2017 में लक्ष्य ने बुल्गारिया ओपन और इसी साल हैदराबाद में हुई इंडिया इंटरनेशनल सीरीज में स्वर्ण पदक जीता। योनेक्स पोलिस ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप में रजत पदक प्राप्त किया। इससे पहले 2014 में स्विस जूनियर ओपन और विंबल्डन जूनियर चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 2012 में इजरायल जूनियर बैंडमिंटन चैंपियनशिप और 2014 में एरोम कप जूनियर बैडमिंटन टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 2018 में अर्जेंटीना में यूथ ओलंपिक में रजत पदक, कनाडा में 2018 में हुए विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा अखिल भारतीय स्तर पर भी लक्ष्य ने कई स्वर्ण पदक अपने नाम किए। 
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