नेशनल स्कूल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में देशभर के युवा खिलाड़ियों के साथ ही उत्तराखंड की बेटियां भी अपने मुक्कों का दम दिखाने को तैयार हैं।
कोचिंग और डाइट की बेहतर व्यवस्था न होने के बावजूद उनका हौसला सातवें स्थान पर है। वह देशभर के मुक्केबाजों का सामना करने और जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दो दिनों के दौरान उन्होंने कई मुकाबले जीते हैं।
प्रतियोगिता में उत्तराखंड की नौ महिला मुक्केबाज हिस्सा ले रही हैं। हल्द्वानी निवासी मुद्रिका खुशी गुरुरानी ने पिछले वर्ष पंजाब में हुई अंडर-14 नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उत्तराखंड के लिए एकमात्र मेडल जीता था। मुद्रिका ने 46-48 किग्रा में कांस्य पदक जीता था।
जीजीआईसी हल्द्वानी की 11वीं कक्षा की छात्रा मुद्रिका ने शानदार खेल दिखाते हुए मौजूदा प्रतियोगिता के अपने दोनों मुकाबले जीते हैं। अब उनकी नजर क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर है। हरियाणा की सीनियर नेशनल प्लेयर सोनिया लाठर को अपना आदर्श मानने वाली मुद्रिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहती हैं।
पिथौरागढ़ निवासी नेहा मेहता अपने तीसरे नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही हैं। केएनयूजीआईसी की 10वीं कक्षा की छात्रा बॉक्सिंग में ही अपना करियर बनाना चाहती हैं। 52-54 किग्रा कैटेगरी की खिलाड़ी नेहा आगे चलकर मैरीकॉम की तरह बनने का सपना देखती हैं।
केएनयूजीआईसी की 9वीं कक्षा की छात्रा रेनू दानू अपना पहला नेशनल खेल रही हैं। 50-52 किग्रा की खिलाड़ी रेनू अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज रही कमला बिष्ट और प्रियंका चौधरी को अपना आदर्श मानती हैं। उन्होंने बताया कि वह नियमित तौर पर दो से तीन घंटे मुक्केबाजी का अभ्यास करती हैं।
नैनीताल निवासी रीतिका आर्य मोहनलाल शाह बालिका विद्यालय नैनीताल की 11वीं कक्षा की छात्रा हैं। 57-60 किग्रा में पहली बार नेशनल खेल रही रीतिका को उनके परिजनों ने ही बॉक्सिंग में करियर बनाने की सलाह दी। अपनी मेहनत के दम पर वह नेशनल प्रतियोगिता में जगह बनाने में कामयाब हुई हैं।
इसी स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा प्रिया मेहरा भी पहली बार राष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में जगह बनाने में कामयाब हुई हैं। 54-57 किग्रा कैटेगरी की बॉक्सर प्रिया का यह पहला नेशनल है। वह पदक जीतने में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहती।