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उत्तराखंड: निजी डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज हुए हलकान, सरकारी अस्पतालों में लगी भीड़

Wed, 31 Jul 2019 10:08 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के विरोध में बुधवार को निजी डॉक्टरों की एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का राजधानी में व्यापक असर दिखा। मरीज इलाज के लिए एक से दूसरे निजी अस्पताल में भटकते रहे। लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला।

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इमरजेंसी को हड़ताल से बाहर रखा गया था, लेकिन इनमें भी मरीजों को जल्द इलाज नहीं मिला। कई डायग्नोस्टिक सेंटर बंद रहने से मरीजों की सामान्य जांच तक भी नहीं हो पाई। 

चकराता रोड स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के कार्यालय के बाहर निजी डॉक्टरों ने एनएमसी बिल की प्रतियां फूंककर अपना आक्रोश जताया। आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के माध्यम से छोटे अस्पतालों को खत्म करने पर तुली हुई है।
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उसके बाद कार्यालय में आयोजित बैठक में आईएमए जिला अध्यक्ष डॉ. संजय गोयल ने बिल की खामियों के बारे में बताया। कहा कि एनएमसी बिल से डॉक्टरों का शोषण होगा और उनके अधिकारों का हनन होगा।

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दून, कोरोनेशन और गांधी शताब्दी में कतारें

ये बिल न तो आमजन के हित में है और न डॉक्टरों के हित में है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सा शिक्षा निम्न वर्ग से दूर हो जाएंगी। बैठक में आईएमए के प्रांतीय महासचिव डॉ. डीडी चौधरी, डॉ. विमल नौटियाल, डॉ. रेखा श्रीवास्तव, डॉ. आलोक आहूजा, डॉ. नवीन आहूजा, डॉ. विक्रांत नंदा, डॉ. डीपी नवानी आदि मौजूद रहे।

निजी डॉक्टरों की हड़ताल के चलते दून, कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पतालों में मरीजों की दोपहर बात तक भी कतारें लगी रही। जिसकी वजह से तीनों अस्पतालों में ओपीडी का समय बढ़ाया गया। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में सामान्य प्रतिदिन औसतन 1200 मरीज पहुंचते हैं।

लेकिन बुधवार को यहां 1700 की ओपीडी रही। जबकि कोरोनेशन और गांधी शताब्दी अस्पताल में करीब 250 मरीज ज्यादा पहुंचे। तीनों सरकारी अस्पतालों में ओपीडी दो बजे तक रहती है। लेकिन, बुधवार को इनमें तीन बजे तक मरीजों को देखा गया। 
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