राष्ट्रीय हिमालय मिशन के तहत प्रोजेक्ट बनाने में अब हिमालयी राज्य मनमानी नहीं कर पाएंगे। केंद्र ने सख्ती बरतते हुए मिशन के लिए प्रोजेक्ट के चार क्षेत्र तय कर दिए हैं। अब केंद्र ने राज्यों को इन्हीं क्षेत्रों से संबंधित प्रोजेक्ट भेजने का मशविरा दिया है।
केंद्र संबंधित क्षेत्रों के प्रोजेक्ट को ही बजट देगा। इसके अलावा हिमालयी राज्य अपनी मर्जी से कोई भी प्रोजेक्ट नहीं भेज पाएंगे। चुनिंदा चार ‘डिमांड रिबन रिसर्च’ प्रोजेक्ट क्षेत्र में जल प्रबंधन को सबसे ऊपर रखा गया है। मिशन के पुराने 42 प्रोजेक्टों को शेष डेढ़ साल की समयावधि में पूरा करने की छूट दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट राष्ट्रीय हिमालय मिशन को कारगर बनाने के लिए केंद्र ने राज्यों की मनमानी पर अंकुश लगा दिया है। अभी तक राज्य कोई भी प्रोजेक्ट भेज कर हिमालय से जोड़ दे थे, जिनका कोई नतीजा नहीं निकलता था।
केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सभागार में 6 जुलाई को हुई बैठक में हिमालय मिशन में चार डिमांड रिबन रिसर्च एरिया तय किए गए। इसके साथ ही केंद्र सरकार 12 हिमालयी राज्यों में नेचर इंटरप्रिटेशन एंड लर्निंग सेंटर स्थापित करने की योजना पर विचार कर रही है। इन सेंटरों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण, आजीविका और कौशल विकास पर कार्य होगा।
राष्ट्रीय हिमालय मिशन की नोडल एजेंसी जीबी पंत इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन एनवायरनमेंट एंड डवलपमेंट के निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी ने बताया कि इनमें जल प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण और आजीविका विकल्प एवं रोजगार हैं।
हिमालयी राज्य अब इन्हीं क्षेत्रों से संबंधित प्रोजेक्ट भेजेंगे। तीन साल तक अब इन्हीं क्षेत्रों पर प्रोजेक्ट स्वीकार किए जाएंगे। नोडल एजेंसी ने जो पुराने 42 प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, उन्हें डेढ़ साल तक और चलाने की सहमति मिल गई है।