नेशनल हाईवे के भूमि अधिग्रहण घोटाले में 170 करोड़ नहीं बल्कि 300 करोड़ से ज्यादा का खेल हुआ है। कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन की ओर से शासन को सौंपी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट में यह बात साफ हुई है।
इसके अलावा एक पीसीएस अधिकारी का नाम और सामने आया है, जो इस घपले में पूरी तरह शामिल रहा है। यही नहीं जांच की आंच नेशनल हाईवे के अधिकारियों के अलावा मुआवजा लेने वाले काश्तकारों तक आ रही है। कमिश्नर ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाकर कार्रवाई की सिफारिश की है।
कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन ने बीते दिनों ऊधमसिंह नगर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-72 के चौड़ीकरण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़ा घोटाला पकड़ा था। कुछ दलालों से मिलीभगत कर चौड़ीकरण के लिए आवश्यक कृषि भूमि को खरीदा गया।
इसके बाद कागजों में हेरफेर करके गैर कृषि में परिवर्तित करके करीब आठ से दस गुना ज्यादा मुआवजा ले लिया। कमिश्नर ने इस मामले की प्राथमिक जांच की तो पता चला कि वर्ष 2011 से 2014 के बीच यहां तैनात रहे करीब दस अधिकारियों ने इस घपले को अंजाम दिया।
इसमें तत्कालीन जिलाधिकारियों के अलावा एसडीएम और डिप्टी कलेक्टरों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की थी। कमिश्नर ने रुद्रपुर, जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, किच्छा, सितारगंज और खटीमा तहसीलों में हुए भूमि अधिग्रहण की पूरी जानकारी ली।
मुआवजे से संबंधित फाइलों को देखा गया। डीके सिंह के अलावा एक और पीसीएस अफसर के इस घपले में शामिल होने के प्रमाण भी मिले हैं, जिसका उल्लेख शासन को सौंपी गई रिपोर्ट में किया गया है। कमिश्नर ने मामले की विस्तृत जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। शासन स्तर पर इसे सीबीआई को भेजने पर भी विचार किया जा रहा है।