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170 करोड़ नहीं बल्कि इतने करोड़ का है एनएच घोटाला, जांच अधिकारियों के भी उड़े होश

Fri, 24 Mar 2017 01:45 PM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo pic
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नेशनल हाईवे के भूमि अधिग्रहण घोटाले में 170 करोड़ नहीं बल्कि 300 करोड़ से ज्यादा का खेल हुआ है। कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन की ओर से शासन को सौंपी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट में यह बात साफ हुई है।
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इसके अलावा एक पीसीएस अधिकारी का नाम और सामने आया है, जो इस घपले में पूरी तरह शामिल रहा है। यही नहीं जांच की आंच नेशनल हाईवे के अधिकारियों के अलावा मुआवजा लेने वाले काश्तकारों तक आ रही है। कमिश्नर ने मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाकर कार्रवाई की सिफारिश की है।

कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन ने बीते दिनों ऊधमसिंह नगर से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-72 के चौड़ीकरण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़ा घोटाला पकड़ा था। कुछ दलालों से मिलीभगत कर चौड़ीकरण के लिए आवश्यक कृषि भूमि को खरीदा गया।
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इसके बाद कागजों में हेरफेर करके गैर कृषि में परिवर्तित करके करीब आठ से दस गुना ज्यादा मुआवजा ले लिया। कमिश्नर ने इस मामले की प्राथमिक जांच की तो पता चला कि वर्ष 2011 से 2014 के बीच यहां तैनात रहे करीब दस अधिकारियों ने इस घपले को अंजाम दिया। 

इसमें तत्कालीन जिलाधिकारियों के अलावा एसडीएम और डिप्टी कलेक्टरों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की थी। कमिश्नर ने रुद्रपुर, जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, किच्छा, सितारगंज और खटीमा तहसीलों में हुए भूमि अधिग्रहण की पूरी जानकारी ली।

मुआवजे से संबंधित फाइलों को देखा गया। डीके सिंह के अलावा एक और पीसीएस अफसर के इस घपले में शामिल होने के प्रमाण भी मिले हैं, जिसका उल्लेख शासन को सौंपी गई रिपोर्ट में किया गया है। कमिश्नर ने मामले की विस्तृत जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश की है। शासन स्तर पर इसे सीबीआई को भेजने पर भी विचार किया जा रहा है।
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सीबीआई भी कर सकती है जांच

- फोटो : demo pic
इस घोटाले की जांच सीबीआई भी शुरू कर सकती है। सूत्रों की मानें तो नेशनल हाईवे के एंगल से देहरादून स्थित सीबीआई दफ्तर से सूचनाएं जुटाई जा रही हैं। उधर शासन स्तर से भी समन्वय बनाकर इस बाबत जानकारी जुटाई जा रही है कि इसमें एनएच अधिकारियों की संलिप्तता कितनी स्पष्ट है। यदि इस घपले की सीबीआई जांच होती है तो इसमें पूरा एक रैकेट सामने आने की उम्मीद है।

जांच से जुड़े अफसरों के मुताबिक धारा-143 में दिए जाने वाले मुआवजे में खेल करने के लिए पूर्व में तैनात रहे तीन-चार अफसरों के हस्ताक्षर करवाने के बाद बैकडेट में कृषि भूमि को अकृषि दिखाया गया, फिर संशोधित दरों पर मुआवजा जारी करना आदि से स्पष्ट है कि यह काम दो-चार अफसरों और कर्मचारियों के वश का नहीं है।

खाते का भी मुआवजा लिंक
देहरादून स्थित स्टेट बैंक के जिस खाते में करोड़ों रुपये नकद जमा किए जाने की बात सामने आई है, उसमें भी ज्यादातर रकम ऊधमसिंह नगर से ही जमा हुई है। प्रारंभिक जांच में भी यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि जिन लोगों ने पैसा जमा किया है, उसमें अधिकांश संख्या उन काश्तकारों की है, जिन्हें एनएच चौड़ीकरण से जुड़ा मुआवजा मिला है। यह खाता आयकर विभाग के राडार पर भी है।

मैंने जांच के बाद तथ्यात्मक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। शासन स्तर से ही इसमें कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
- डी. सेंथिल पांडियन, कमिश्नर (कुमाऊं)
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