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हड़ताल से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हुआ 'बीमार'

Tue, 13 Oct 2015 04:01 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन खुद बीमार हो गया है।
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दो वर्ष से मिशन निर्धारित लक्ष्यों से पीछे चल रहा है। केंद्र पहले ही मिशन के प्रस्तावित बजट में भारी कटौती कर सवाल खड़ा कर चुका है। ऐसे में मिशन के तहत अनुबंधित सैंकड़ों कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाएगी।

ऐसा नहीं है कि कर्मचारी एकाएक हड़ताल पर उतर आए। इससे पहले मिशन निदेशक पर दुर्व्यवहार को लेकर कर्मचारी सामूहिक इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। पटरी से उतर चुके मिशन और कर्मचारियों की हड़ताल से अब आला अधिकारियों पर सवाल उठ गए हैं।
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मिशन को लेकर सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के साथ विभागीय अधिकारियों की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा हुई। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने बताया कि सचिव स्वास्थ्य के अधीन एक कमेटी गठित कर दी है जो कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर वार्ता कर रिपोर्ट सौंपेगी।

प्रदेश के कामकाज से खुश नहीं केंद्र
एनएचएम के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए केंद्र से मिले बजट में 100 करोड़ से अधिक का कट लगा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि स्वास्थ्य विभाग बीते वर्ष का बजट तक नहीं खर्च पाया। केंद्र इस बात से भी नाराज है कि बीते वर्ष उपयोगिता प्रमाण पत्र तक समय पर केंद्र को नहीं भेजे। प्रदेश के पीआईपी में खामियों के चलते इस वर्ष की कार्ययोजना अन्य राज्यों के सापेक्ष दो माह देरी से केंद्र ने स्वीकृत की है।

एमडी से नाराज थे कर्मचारी
विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारी पहली प्रोफेशनल आला अधिकारियों पर अर्मयादित भाषा, दुर्व्यवहार से लेकर मानसिक उत्पीड़न के संगीन आरोप जड़े हैं। एक दशक से अनुबंधित दो दर्जन से अधिक कर्मियों ने मुख्य सचिव को पत्र लिख अपने सामूहिक त्यागपत्र तक के लिए मुख्य सचिव स्वास्थ्य को मई माह में पत्र लिखा था। पत्र से मिशन निदेशक की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे़ किये गए हैं।
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कई प्रोफेशनल छोड़ चुके मिशन को
मिशन के तहत वित्त प्रबंधन, प्रोग्राम अधिकारी प्रशिक्षण, एचआईएमएस कन्सलटेंट सहित 10 लोग इस्तीफा सौंप चुकेहैं, लेकिन उसके कारणों की किसी भी स्तर पर जांच नहीं हो रही।
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