एनएचएम की योजनाओं के लिए प्रदेश को हर साल केंद्र सरकार से लगभग 450 करोड़ रुपये मिलते हैं। वर्ष 2015-16 में 375 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इससे अगले वर्ष 2016-17 में इसे बढ़ाकर 392 करोड़ रुपये कर दिया गया। जहां तक बजट के खर्च करने की बात है तो यह अनिवार्य रूप से खर्च किया जाता है। यानी देर भले ही हो लेकिन पूरा बजट योजनाओं पर खर्च करना होता है।
बाकी राज्यों से नहीं ली सीख
इस सूची में तेलंगाना देश के 21 बड़े राज्यों में पहले नंबर है। सबसे बड़ा सुधार भी इसी राज्य में हुआ है। वर्ष 2015-16 में इस राज्य में राज्य कोषागार से एजेंसियों को पैसा जारी होने में आठ माह तक का समय लगता था, लेकिन 2017-18 में वहां के सिस्टम में जबरदस्त सुधार हुआ और इसे सेम डे ट्रांसफर पर ले आए। इस लिस्ट में लगभग सात राज्य ऐसे हैं जिन्होंने अपने इस औसत समय में सुधार किया है।
- राष्ट्रीय वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण
- राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम
- राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम
- राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम
- व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम
- राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम
- एचआईवी परामर्श व जांच केंद्र
- यौन रोग नियंत्रण क्लीनिक
- रक्त सुरक्षा कार्यक्रम
- सामान्य के लिए यूनिवर्सल स्क्रीनिंग
- राष्ट्रीय ओरल हेल्थ प्रोग्राम