हरिद्वार के गंगा घाटों पर बिखरी रहने वाली प्लास्टिक और पॉलीथिन की गंदगी को लेकर एनजीटी लगातार सख्त रवैया अपना रहा है।
ग्रीन पैनल ने तल्ख अंदाज में कहा है कि हम भी हरिद्वार का दौरा कर सकते हैं ऐसे में यदि गंदगी पाई गई तो़ संबंधित अधिकारियों को कड़ा दंड मिलेगा। वहीं ग्रीन बेंच के सामने पेश हुए सरकारी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पॉलीथिन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। प्लास्टिक की बोतलें घाटों पर नहीं बिक रही हैं।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए पूछा कि सीधे गंगा में अपशिष्ट छोड़ने वाले और बिना अनुमति के चलने वाले होटलों पर क्या कार्रवाई हुई? इस पर मौजूद एडीएम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पेय जल निगम के अधिकारी ने कहा कि होटलों पर अभी तक कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
ग्रीन पैनल ने कहा कि क्यों नहीं आप लोगों ने अभी तक 5 से 6 होटलों को बंद करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया। यदि आप ऐसा करेंगे तो आपको असर दिखने लगेगा।
बुधवार को होगी सुनवाई
ग्रीन बेंच ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। मौजूद अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि यदि इस बीच यह पाया जाता है कि ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा तो आप सभी दंडित होंगे।
वहीं उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश अधिकारियों ने ग्रीन बेंच को बताया कि गंगा नदी में जाने वाले अपशिष्ट के शोधन को लेकर खाका तैयार कर लिया गया है। इस पर जल्द ही काम शुरू होगा।
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से मौजूद वरिष्ठ एडवोकेट एमसी मेहता ने हरिद्वार में गंगा नदी के लिए सीवेज सिस्टम को लेकर जल्द काम शुरू करने की मांग की।
बीती सुनवाई में लगी थी फटकार
मालूम हो कि 10 सितंबर को हुई सुनवाई में प्रधान पीठ ने उत्तराखंड सरकार को हीलाहवाली और लेटलतीफी के लिए फटकार भी लगाई थी। साथ ही ग्रीन पैनल ने उत्तराखंड सरकार से एक हफ्ते के भीतर डेवलपमेंट एक्शन प्लान की मांग की थी।
सरकार को एसटीपी, कूड़ा-कचरे के निस्तारण और अन्य बिंदुओं को समेटते हुए खाका तैयार कर पेश करना था। अधिकारियों ने बताया कि आदेश बाद उत्तराखंड सरकार के आला अधिकारियों ने खाका तैयार करने को लेकर हाल ही में मीटिंग की है।