राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 10 सितंबर को जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। इसके तहत जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक से छह वर्ष आयु के बच्चों, सभी सरकारी-गैर सरकारी विद्यालयों के छह से 19 वर्ष आयु के छात्रों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। जनपद में 6,20,078 बच्चों को दवा खिलाने का लक्ष्य है।
विद्यालय में गैर-पंजीकृत बच्चों, झुग्गी बस्तियों तथा निर्माणाधीन साइट पर निवासरत बच्चों को यह दवा नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र पर खिलाई जाएगी। यह दवा बच्चों के पेट में होने वाले कृमि संक्रमण को रोकने के लिए खिलाई जाती है। 10 सितंबर को दवा खाने से वंचित बच्चों और किशोरों को 18-19 सितंबर को अभियान चलाकर दवा खिलाई जाएगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय जैन ने अभिभावकों से 10 सितंबर को बच्चों को विद्यालय-आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजने की अपील की है।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एनएचएम डॉ. निधि रावत ने बताया कि जिले में सभी शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिले में सभी विकासखंडों में दवा पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
Iकृमि संक्रमण के प्रभावI
कृमि संक्रमण से बच्चों और किशोर-किशोरियों में खून की कमी, कुपोषण, भूख न लगना, बेचैनी, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त जैसी परेशानियां होने लगती हैं। इसके कारण बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित होता है। दवा खिलाने से बच्चों में खून की कमी में सुधार, बेहतर पोषण स्तर, स्वस्थ रहने से सीखने की क्षमता में मदद, कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होती है। बच्चों को दवा खिलाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें। गोली को हमेशा चबाकर खाने के लिए कहें। छोटे बच्चों को गोली पीसकर खिलाएं।