राजधानी के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में छात्र के साथ रैगिंग और यौन शोषण के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को डीएवी पीजी कॉलेज के छात्रों ने मामले को दबाने का आरोप लगा विद्यालय में जमकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने चेतावनी देते हुए कहा, महीने भर के भीतर आरोपी छात्रों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वह उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल के नेतृत्व में चार दर्जन छात्र दोपहर करीब 12 बजे विद्यालय पहुंचे। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्र जबरन गेट खोलकर स्कूल के भीतर पहुंच गए। छात्रों ने प्रधानाचार्य व प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और प्रधानाचार्य से वार्ता की मांग की। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र मांग पर डटे रहे। सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा, पूरे प्रकरण में स्कूल प्रशासन दोषी है। पुलिस ने छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को प्रधानाचार्य से मिलवाया। प्रधानाचार्य ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त किया।
प्रदर्शन करने वालों में तुषार वैध, शुभम चौहान, सौरभ पोखरियाल, सौरभ सेमवाल, मानिका चौधरी, पारस चौहान, शरद कुमार, अंशुल नौटियाल, वत्सल ठाकुर, मंथन भाटिया, अभिषेक कुमार, बकुल मखीजा मौजूद रहे।
Iपुलिस जांच में पूरा सहयोग करेगा स्कूल प्रशासन : प्रधानाचार्यI
स्कूल की प्रधानाचार्य ने कहा, पुलिस जांच में स्कूल प्रशासन पूरा सहयोग करेगा। बच्चों से जुड़े हर मामले को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। विद्यालय परिसर के हर भवन में सुझाव बॉक्स और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनकी समीक्षा हर सोमवार को की जाती है। बताया, 18 मई को विद्यालय में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के बाद छात्र अपने परिवार के साथ असम चला गया था। इसके बाद आठ जुलाई को उसने स्कूल छोड़ दिया। परिजनों ने किसी भी प्रकार से विद्यालय प्रशासन से संपर्क नहीं किया। इस मामले में स्कूल ने अपनी जांच कर ली है। छात्र के क्लासमेट, रूममेट्स, दोस्तों के साथ बात की गई। आंतरिक जांच किए जाने के बाद रैगिंग का कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर परिजन के पास रैगिंग को लेकर कोई तथ्य हैं तो उन्हें स्कूल के साथ साझा कर सकते हैं।
Iपहले भी चर्चाओं में आया था विद्यालयI
कैंटीन में हलाल मीट परोसने वाले टेंडर से भी विद्यालय चर्चाओं में आया था। हालांकि, मामला बढ़ने के बाद विद्यालय प्रशासन की ओर से टेंडर को निरस्त कर दिया गया था।