गीतिका पिथौरागढ़ के एक विद्यालय में इंटर में पढ़ती थी। पढ़ने में होशियार गीतिका अच्छी बॉक्सर थीं। उन्होंने बॉक्सिंग में राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया था। बताया जा रहा है कि वह कुछ दिनों से बीमार थी, उसका इलाज चल रहा था। बीमारी की वजह से वह मानसिक अवसाद से ग्रस्त थी। गीतिका के पिता डिग्री कॉलेज मुवानी में चौकीदार के पद पर तैनात हैं। दो संतानों में गीतिका बड़ी थीं। उसका एक छोटा भाई है। गीतिका की मौत से घर में कोहराम मचा है।
घुटने की चोट से प्रैक्टिस में असर पड़ने से अवसाद में थी गीतिका
कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने वाली बाक्सर गीतिका राठौर ने वर्ष 2015 में देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय बाक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल जीता था। घुटने की चोट के बाद प्रैक्टिस में असर पड़ने से वह अवसाद में थी। थल-मुवानी क्षेत्र निवासी गीतिका होनहार बॉक्सर थी। उसने नवीं कक्षा से बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। जिला स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद उसका चयन राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ था।
पूर्व में गीतिका के कोच रह चुके प्रकाश जंग थापा ने बताया कि वर्ष 2015 में गीतिका ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर गोल्ड मैडल जीता था। गोल्ड मैडल जीतने के बाद वह बेहद उत्साहित थी। लेकिन इसी बीच देहरादून में एक प्रतियोगिता के दौरान उसके घुटने में चोट लग गई। घुटने के आप्रेशन के बाद लगातार दर्द रहता था। इससे उसके प्रैक्टिस पर असर पड़ रहा था। इससे वह अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित थी। माना जा रहा है कि भविष्य की चिंता ने ही उसे अवसादग्रस्त कर दिया। इससे उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
स्पोर्ट्स कॉलेज में उसके कोच रहे ललित कुंवर ने बताया कि उसमें बॉक्सिंग के प्रति काफी जुनून था और आगे जाकर उसमें इंडिया के लिए खेलने की क्षमता थी। बृहस्पतिवार सुबह यह खबर आई, तबसे मैं और उसके साथी व्यथित हैं।