18 अगस्त से हिमालयी महाकुंभ श्रीनंदा राजजात शुरू होनी है। तमाम दावों और आश्वासनों के बाद भी अब तक धरातल पर एक भी कार्य शुरू नहीं हुए हैं।
280 किमी की 20 पड़ावों से होकर गुजरने वाली रहस्य और रोमांच से भरपूर श्रीनंदा राजजात यात्रा को लेकर लोगों में उत्साह है। इसके सफल आयोजन के लिए दो वर्षों से किए जा दावे धरातल पर नहीं दिख रहे हैं।
नहीं हुआ मरम्मत का कार्य
पिछले वर्ष करोड़ों के काम आपदा की भेंट चढ़ गए थे। अब आठ माह बाद भी मरम्मत या पुनर्निर्माण कार्य इंच भर भी आगे नहीं बढ़े।
राजजात से जुड़े नौ मोटर मार्गों और पैदल रास्तों की हालत अब भी दयनीय है। राजजात विकास परिषद के सदस्य सुशील रावत कहते हैं कि प्रशासन और विभागों की सुस्ती से तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।
पड़ावों पर नहीं पेयजल व्यवस्था
बीते वर्ष राजजात के लिए 13 बस्ती और 6 निर्जन पड़ावों में पानी की व्यवस्था के लिए करीब तीन करोड़ मिले थे। 23 पेयजल टैंकों का निर्माण होना था।
पड़ावों पर पेयजल लाइनें भी बिछनी थी। ज्यादातर स्थानों पर न लाइनें बिछी न टैंक बने। नौटी-चौरासैंण, चांदपुर गढ़ी-सेम सहित तीन पेयजल योजनाओं का विवाद भी नहीं सुलझा है।