20 को होमकुंड में पूजा के बाद विदा होगा खाडू
मां नंदा की बड़ी जात पांच सितंबर को कुरुड़ मंदिर से प्रस्थान कर विभिन्न पड़ावों से होते हुए 12 सितंबर को रामणी गांव पहुंचेंगी। यहां फरस्वाण फाट के जाख देवता, त्यूणा रचकोटी, दशमद्वार काली, बंड, लाता, बदरीनाथ की डोली और छंतोलियों का मिलन होगा। उसके बाद आला, सितेल, कनोल पड़ाव से होते हुए 15 को जात लाटू देवता के मंदिर वाण पहुंचेगी। यहां से जात रणकधार और गैरोली पातल होते हुए 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी, जहां मां नंदा की सप्तमी की पूजा आयोजित होगी। 19 को जात बगुवावासा, पातर नचौणिंया, कैलवा विनायक, रुपकुंड, ज्योंरागली होते हुए शिलासमुद्र पहुंचेंगे। 20 सितंबर को होमकुंड में मां नंदा की पूजा और चौसिंग्या खाडू की विदाई होगी। उसी दिन श्रद्धालु वापस रात्रि प्रवास के लिए जामुनडाली नामक स्थान में पहुंचेंगे। 30 सितंबर को मां नंदा की डोली सुतोल, पैरी, सितेल, गुलाड़ी, नारंगी, फरखेत पड़ाव होते हुए सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में पहुंचेगी। इसी के साथ मां नंदा की बड़ी जात का समापन भी हो जाएगा।
ये भी पढ़ें...उत्तराखंड: प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में आज से घर-घर जनगणना, ओटीपी या वित्तीय जानकारी नहीं मांगी जाएगी
मां नंदा की बड़ी जात की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मुख्यमंत्री को जात के शुभारंभ के लिए न्योता दिया गया है। शासन-प्रशासन से जात के पड़ावों में व्यवस्थाएं बनाने की मांग की गई है। -कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत, अध्यक्ष, नंदा बड़ी जात समिति, कुरुड़, चमोली