बल्लियों के सहारे पिंडर नदी पार कर रही ननद-भाभी पैर फिसलने से नदी में जा गिरी। इनमें एक महिला का शव बरामद हो गया है जबकि दूसरी महिला का अब तक पता नहीं चल सका है।
सिस्टम की काहिली का आलम यह है कि वर्ष 2013 की आपदा में बहे पुल-पुलियाओं का पांच वर्ष बाद भी निर्माण नहीं किया गया है। लोग जोन जोखिम में डालकर लकड़ी की अस्थायी पुलिया के सहारे नदी-नाले पार करने को मजबूर हैं।
सोमवार को चमोली जिले के देवाल ब्लाक के अंतर्गत ननद-भाभी नदी में बह गईं। खेता गांव निवासी खिलाफ सिंह ने बताया कि भौरियाबगड़ में पिंडर नदी पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाने के लिए ग्रामीणों ने दो बल्लियां रखी थीं।
सोमवार को भौरियाबगड़ की खष्टी देवी (35) और उसकी ननद आनंदी (19) इन्हीं बल्लियों के सहारे नदी पार कर रही थीं, तभी पैर फिसलने से दोनों पिंडर नदी में जा गिरी। खष्टी देवी का शव नदी से 500 मीटर दूर मिला, जबकि आनंदी का अभी तक पता नहीं चल सका है।