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उत्तराखंड: बल्लियों के सहारे नदी पार कर रही ननद-भाभी तेज बहाव में बहीं, एक का शव बरामद

Tue, 16 Oct 2018 08:38 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चमोली
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river death - फोटो : amarujala
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बल्लियों के सहारे पिंडर नदी पार कर रही ननद-भाभी पैर फिसलने से नदी में जा गिरी। इनमें एक महिला का शव बरामद हो गया है जबकि दूसरी महिला का अब तक पता नहीं चल सका है।

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सिस्टम की काहिली का आलम यह है कि वर्ष 2013 की आपदा में बहे पुल-पुलियाओं का पांच वर्ष बाद भी निर्माण नहीं किया गया है। लोग जोन जोखिम में डालकर लकड़ी की अस्थायी पुलिया के सहारे नदी-नाले पार करने को मजबूर हैं।

सोमवार को चमोली जिले के देवाल ब्लाक के अंतर्गत ननद-भाभी नदी में बह गईं। खेता गांव निवासी खिलाफ  सिंह ने बताया कि भौरियाबगड़ में पिंडर नदी पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाने के लिए ग्रामीणों ने दो बल्लियां रखी थीं।
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सोमवार को भौरियाबगड़ की खष्टी देवी (35) और उसकी ननद आनंदी (19) इन्हीं बल्लियों के सहारे नदी पार कर रही थीं, तभी पैर फिसलने से दोनों पिंडर नदी में जा गिरी। खष्टी देवी का शव नदी से 500 मीटर दूर मिला, जबकि आनंदी का अभी तक पता नहीं चल सका है।

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दर्जनों पुल और पैदल पुलिया बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे

यहा बता दें कि वर्ष 2013 की आपदा में रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में दर्जनों पुल और पैदल पुलिया बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। आज पांच साल गुजरने के बाद भी कई स्थानों पर पुलों और पैदल पुलियाओं का निर्माण नहीं किया गया है।

चमोली जिले की उर्गम घाटी में चार गांवों के लोग कल्प गंगा को लकड़ी की बल्लियों के सहारे पार करने को मजबूर हैं। थराली के चपेड़ों, देवाल ब्लाक के बोरागाड़ और सुतलीगाड़ में बहे पुल भी आज तक नहीं बने हैं।

यहां भी लोग लकड़ी केअस्थायी पुलों के सहारे नदियों को पार कर रहे हैं। यहां अब नदियों का जल स्तर घटने पर ग्रामीण स्वयं अस्थायी पुल बनाने में जुटे हैं। रुद्रप्रयाग जिले में विजयनगर, विद्यापीठ और चंद्रापुरी में भी पुलों का निर्माण नहीं किया गया है। इससे लोग ट्राली केसहारे नदियों को पार कर रहे हैं।
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