आरोपी बाबा इतने शातिर थे कि दोनों ग्रामीणों के साथ हिमांशु को ढूंढ रहे थे ताकि किसी को उन पर शक न हो। यही नहीं कोसी नदी के किनारे हिमांशु के कपड़े पड़े होने की सूचना भी ग्रामीणों को उन्हीं में से एक ने दी। बाद में दोनों की पोल खुलने पर ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए राजस्व पुलिस उन्हें बेतालघाट तहसील ले गई।
बाबाओं को भोजन कराता था हिमांशु
हिमांशु दोनों बाबाओं की खूब सेवा करता था। परिजनों ने बताया कि बाबा हिमांशु से अच्छे से परिचित थे। वह उन्हें भोजन भी कराता था। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने हिमांशु को अगवा किया। वे हिमांशु को अपनी तरह बाबा बनाना चाहते थे।
क्षेत्र में घूम रही थी हरियाणा नंबर की कार
ग्रामीणों के अनुसार हिमांशु को आरोपी बाबा गांव से बाहर ले जाने की तैयारी में थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हरियाणा के नंबर की एक कार भी क्षेत्र में देखी गई, जिससे पता चलता है कि वह इसी कार से हिमांशु को अपने साथ ले जाने की फिराक में थे। ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते उन्हें हिमांशु के गायब होने का पता चल गया, नहीं तो आरोपी अपनी साजिश में कामयाब हो जाते।
संयुक्त मजिस्ट्रेट ने भी पहुंचकर जानकारी ली
संयुक्त मजिस्ट्रेट प्रतीक जैन ने भी मौके पर पहुंचकर जानकारी ली। उन्होंने जांच के बाद दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। इस दौरान कौश्याकुटौली की नायब तहसीलदार बरखा जलाल, प्रधान मंजू देवी, मदन सिंह, पूरन सिंह, चंदन सिंह, कुबेर सिंह, वीरेंद्र सिंह, गंगा देवी, नंदी देवी समेत बेतालघाट और खैरना पुलिस मौजूद थी।