हाईकोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को राष्ट्रीय राजमार्ग-58 के निर्माण में विलंब करने के दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस राजमार्ग के बनाने में विलंब के लिए जिम्मेदार कंपनी हरिद्वार हाईवे प्रोजेक्ट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा है। कोर्ट ने दस साल में इस राजमार्ग का निर्माण न होने पर नाराजगी जताई और सितंबर 2019 तक हर हाल में इसका निर्माण पूरा करने के आदेश दिए हैं।
हरिद्वार निवासी अख्तर मलिक की याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा कि हरिद्वार और रुड़की के बीच एनएच-58 का काम 2008 में शुरू होकर एक मार्च 2013 को पूरा होना था। पीठ ने केंद्रीय सड़क परिवहन सचिव को इस देरी के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए विभागीय कार्रवाई करने को कहा। कोर्ट ने छह माह के भीतर समस्त राष्ट्रीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने के भी निर्देश दिए हैं।
सभी राजमार्गों से छह माह में हटाएं अतिक्रमण, अन्य निर्देश
1. नारसन मोटर मार्ग और शालाखाल के बीच की लिंक रोड के निर्माण पर प्रदेश सरकार तीन माह के अंदर अंतिम निर्णय ले
2. प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में यातायात की सुगमता के लिए दिए गए सुझावों और प्रस्तावों का अनुपालन सख्ती से कराया जाए।
3. प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करे कि पूरे प्रदेश में कहीं भी ट्रेफिक जाम की स्थिति न बने
4. व्यस्त चौराहों पर पर्याप्त संख्या में ट्रेफिक सिग्नल लाइट लगाई जाएं।
5. सभी राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों से छह माह के अंदर अतिक्रमण हटाया जाए
6. प्रदेश को जाम मुक्त बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक बुलाकर उपाय तलाशे जाएं।
7. एनएच के रखरखाव संबंधी हिमालयन कंस्ट्रक्शन से जून 2018 में किए गए एग्रीमेंट पर भी उचित निर्णय लेते हुए समुचित कार्यवाही करें।