याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में अपने फैसले में भी नजूल भूमि के उपयोग के लिए व्यवस्था की है। इसके बावजूद सरकार नजूल भूमि का सार्वजनिक उपयोग करने के बजाय अवैध कब्जेदारों और व्यक्ति विशेष के हित में कर रही है।
खंड पीठ ने कहा कि लोकतंत्र विधि नियम (रूल आफ लॉ) से चलता है। सरकार की यह नीति विधि नियम के खिलाफ है। नजूल भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाए और यह भूमि बीपीएल, गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग आदि के लोगों को आवंटित की जाए।
विधि विश्वविद्यालय के खाते में जमा होगा जुर्माना
कोर्ट के मुताबिक जुर्माने की यह धनराशि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के खाते में जमा होगी। कोर्ट में मंगलवार को ही ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का मामला में भी सुनवाई हुई। कोर्ट में सरकार ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के लिए उनके पास पैसा नहीं है।
इस पर हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की ओर से विश्वविद्यालय के लिए धनराशि देने पर सहमति जताई। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि इसके लिए एक अलग से खाता खोला जाए और यह पैसा उस में जमा कराया जाए। कोर्ट ने सरकार पर लगाए गए जुर्माने के पांच लाख रुपये भी इसी खाते में जमा करने का आदेश दिया।