नैनीताल हाईकोर्ट ने रुड़की नगर निगम व नगर पंचायत सेलाकुई में दो माह के भीतर चुनाव कराने के आदेश जारी किए हैं। इतना ही नहीं कोर्ट ने चुनाव पुराने परिसीमन के आधार पर कराने को कहा है। बता दें कि मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी। रुड़की नगर निगम के पूर्व मेयर यशपाल राणा व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने पाड़ली व रामपुर गुजर को 2015 में नगर निगम में शामिल किया था। बाद में सरकार ने नियम विरुद्ध तरीके से 6 दिसंबर 2018 को नोटिफिकेशन जारी कर इन दोनों गांवों को नगर निगम क्षेत्र से बाहर कर दिया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि एक बार अगर किसी गांव को नगर-निगम में शामिल कर लिया गया है तो उसे बाहर करने का कोई भी प्रावधान नहीं है। दोनों गांवों को नगर निगम से बाहर करने का कोई कारण ग्रामीणों को नहीं दिया गया है। इस विवाद के चलते अभी तक नगर निगम का चुनाव नहीं हो पाया है।
सुप्रीम कोर्ट से पूछेगी सरकार-अब हम क्या करें
रुड़की नगर निगम के चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर सरकार अब सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट से सरकार पूछेगी कि नगर निगम रुड़की के चुनाव को लेकर वह क्या करे। क्या वह चुनाव न कराए। क्या वह चुनाव की प्रक्रिया को यहीं पर रोक दे। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार ने नगर निगम रुड़की के आरक्षण की अधिसूचना की है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके आधार पर चुनाव कार्यक्रम सरकार को भेजा है। सरकार चुनाव कराने के पक्ष में है। इस पर अपना निर्णय देने को तैयार भी है, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब यह जरूरी हो जाता है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट से मार्गदर्शन प्राप्त करे। कौशिक का कहना है कि सरकार इसी रास्ते पर आगे बढे़गी। इन स्थितियों के बीच, रुड़की के मुद्दे पर जहां सरकार हाईकोर्ट के आदेश से असहज दिख रही है, वहीं सेलाकुई को लेकर वह कोई दिक्कत महसूस नहीं कर रही है। हालांकि रुड़की के मामले में सरकार को ये भी उम्मीद है कि अंतिम फैसला उसके हक में ही रहेगा।