याचिकाकर्ता का कहना था कि 23 अक्तूबर को नामांकन करने की तिथि थी और आयोग ने उनका नाम हटाने का आदेश 22 अक्तूबर को दिया। उनका नाम ग्रामीण क्षेत्र की मतदाता सूची से तो हटा दिया गया, लेकिन बड़कोट नगर पालिका की मतदाता सूची में नहीं जोड़ा।
22 अक्तूबर को निर्वाचन आयोग ने देहरादून से रिपोर्ट मंगाकर कहा कि उनका नाम देहरादून की वोटर लिस्ट में भी है। याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने कभी भी देहरादून की वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाने के लिए आवेदन नहीं किया।
उनको इसमें फंसाया जा रहा है। उन्होंने नगर पालिका बड़कोट की मतदाता सूची में नाम नहीं जोड़ने के मामले को पूर्व में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। इसी बीच, जिलाधिकारी उत्तरकाशी ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि जसोदा राणा का नाम बड़कोट जिला पंचायत की वोटर लिस्ट से कट चुका है, इसलिए उनको जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटा दिया जाए।