हरिद्वार में गंगा घाटों की सफाई और अतिक्रमण हटाने के मामले में नगर निगम हरिद्वार के जवाब से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने दो कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए हैं। कोर्ट कमिश्नर शनिवार को घाटों का निरीक्षण कर कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेंगे। कोर्ट ने दोहराया कि शहर के नालों की गंदगी किसी भी तरह से गंगा में न गिरे और सफाई कार्य पर सीसीटीवी के जरिये नजर रखी जाए।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान नगर निगम हरिद्वार के प्रतिनिधि ने बताया कि घाटों की सफाई कर दी गई है और प्लास्टिक कचरा हटा दिया गया है। जबकि, याची बागपत निवासी नरेंद्र ने कोर्ट को बताया कि घाटों की सफाई नहीं की गई है। घाटों में प्लास्टिक कचरा पड़ा हुआ है। मिगलानी ने अपनी बात को पुष्ट करने के लिए कोर्ट में घाटों के फोटो भी पेश किए। इस पर पीठ ने निखिल सिंघल और चेतन जोशी को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया। कोर्ट ने इन्हें शनिवार को घाटों का निरीक्षण कर अदालत में रिपेर्ट पेश करने को कहा है।
हाईकोर्ट ने दोनों कोर्ट कमिश्नरों से अतिक्रमण का निरीक्षण करने को भी कहा है। कोर्ट ने कहा कि घाटों की सफाई बराबर हो और सीसीटीवी के जरिये सफाई कार्य पर नजर रखी जाए। पूर्व में कोर्ट ने नगर निगम हरिद्वार को घाटों की सफाई करने, प्लास्टिक का कचरा हटाने का आदेश दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि नगर निगम हरिद्वार अपने दायित्व का निर्वहन नहीं कर रहा है। सफाई का काम नगर निगम का है और यही काम हरिद्वार में घाटों में नहीं हो रहा है।