सरकार के सारे फैसले राज्यपाल की स्वीकृति के आधार पर ही होते हैं। जिस तरह का बिजनेस रूल है, उसमें यह तय है कि कौन सी फाइल राजभवन भेजी जाएगी और कौन नहीं। सारी फाइलें राजभवन नहीं भेजी जा सकती हैं। सरकार राज्यपाल के नाम से ही चलती है। कांग्रेस का शासन रहा हो या भाजपा का ऐसा ही होता आया है। हम इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं।
-मदन कौशिक, नगर विकास मंत्री, उत्तराखंड।
हाईकोर्ट का आदेश जब तक हमारे पास नहीं आ जाता, तब तक कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं है। विभाग ने जल्द चुनाव कराने के लिए अपने स्तर पर सारे प्रयास किए हैं। अब क्या स्थिति बनती है, फिलहाल कहा नहीं जा सकता।
-आरके सुधांशु, नगर विकास सचिव, उत्तराखंड।
फैसले के खिलाफ डबल बेंच जाएगी सरकार
नगर निकायों के परिसीमन को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को सरकार चुनौती देगी। सरकार ने इस मामले को डबल बेंच में ले जाने का निर्णय लिया है। रुद्रपुर परिसीमन के मामले में कुछ दिन पहले ही सरकार को डबल बेंच में जाने के बाद सफलता मिली थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि रुद्रपुर निकाय के परिसीमन की अधिसूचना करते हुए सरकार आरक्षण प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
पिछले करीब नौ महीने से सरकार चुनाव से पूर्व की प्रक्रिया में उलझी हुई है। इस बार व्यापक स्तर पर निकायों का सीमा विस्तार हुआ, तो उसी अनुपात में हाईकोर्ट तक याचिकाएं भी पहुंच गईं। नतीजा ये हुआ कि तीन मई तक नगर निकाय चुनाव नहीं हो पाए और प्रशासक राज कायम हो गया। सीमा विस्तार और फिर परिसीमन के मसले में इतने पेंच फंस गए हैं कि फिलहाल ये मामला बेहद उलझा दिख रहा है।
इन स्थितियों के बीच, ये माना जा रहा था कि 23 नगर निकायों में सीमा विस्तार और परिसीमन की प्रक्रिया दोबारा कर लिए जाने के बाद सरकार को राहत मिल जाएगी। ये भी अनुमान लगाया जा रहा था कि नगर निकाय चुनाव की राह अब बहुत मुश्किल नहीं रह गई है। मगर सोमवार को हाईकोर्ट के फैसले से सरकार को जोर का झटका लगा है। हाईकोर्ट का फैसला सोमवार को जिस वक्त आया, नगर विकास मंत्री मदन कौशिक अफसरों के साथ विधानसभा में नगर विकास की बैठक में थे। आनन-फानन में उन्होंने अफसरों से इस मसले पर चर्चा की और फिर सरकार का रुख साफ कर दिया।