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नैनीताल हाईकोर्ट ने पूछा, नशे के बड़े सौदागरों को न पकड़ने की वजह राजनीतिक दबाव तो नहीं

Fri, 20 Jul 2018 09:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI
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नशे के बढ़ते कारोबार पर नाराज हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और स्वापक औषधि नियंत्रक से साफ पूछा कि नशे के बड़े सौदागरों को न पकड़ने की वजह कोई राजनीतिक दबाव तो नहीं है। कोर्ट में शुक्रवार को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और स्वापक औषधि नियंत्रक के जोनल डायरेक्टर पेश हुए और उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बड़े ड्रग माफिया नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।

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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने पूर्व में प्रदेश में युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी और उसकी रोकथाम को लेकर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से  कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।  शुक्रवार को सुनवाई में दोनों अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि ड्रग्स की समस्या लगातार बढ़ रही है। कोर्ट ने पूछा कि वे बताएं कि  बडे़ माफियाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। अब तक सिर्फ छोटे माफिया को ही पकड़ा गया है। क्या इन बड़े नशे के सौदागरों को न पकड़ने के लिए कोई राजनीतिक दवाब तो नहीं है।

जवाब में अधिकारियों ने कहा कि कोई भी बड़ा सप्लायर नहीं पकड़ा गया है क्योंकि ये सप्लायर अन्य राज्यों से अपना कारोबार चला रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में बडे़ माफिया नहीं है। बरेली, हिमाचल और नेपाल से उत्तराखंड में ड्रग्स सप्लाई होती है। कोर्ट ने पूछा कि नेपाल बॉर्डर पर ड्रग तस्करी कैसे नियंत्रित की जाती है। अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि इसके लिए वे बीएसएफ की मदद लेते हैं। कोर्ट ने पूछा कि यदि उनके पास बजट, स्टाफ और उपकरण की कमी है तो वे कोर्ट को बताएं। इसके लिए अदालत उचित आदेश पारित करेगी। कोर्ट ने इन दोनों अधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का पूरा ब्योरा देने के आदेश भी दिए हैं।
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श्वेता मासीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार और प्रशासन युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा पा रही है। सरकार नशे के सौदागरों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है। खंडपीठ ने प्रदेश के 27 विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा निदेशक, विद्यालयी शिक्षा निदेशक, सभी जिलाधिकारियों व जिलों के पुलिस प्रमुखों से जवाब मांगा था। अधिकतर पक्षकारों की ओर से जवाब पेश कर दिया गया था। खंडपीठ ने जवाब से असहमति जाहिर करते हुए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा था।

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