नैनीताल स्थित भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान में इन दिनों चार्ली, बिट्टू, बनारू, ज्योति, नेहा व बिन्नू (सांभर), मिक्की व नूतन (ब्लू शिप), नरेंद्र (मारखोर) और सोनू व सोनी (चीतल) 'बादाम' बड़े ही चाव से खा रहे हैं।
इससे सर्दी में गर्मी को एहसास तो हो ही रहा है, साथ ही पोषक तत्वों की भी भरपाई हो रही है। आखिर ये पहाड़ी 'बादाम' हैं क्या? जाड़ों के मौसम में इन दिनों जो बांज के बीज (पहाड़ी बादाम) पेड़ से गिरकर बेकार हो रहे हैं वह वन्य प्राणियों के लिए संजीवनी का काम कर रहे हैं।
बता दें जू में विभिन्न प्रकार के उच्च स्थलीय वन्य प्राणियों, फीजेंट्स व पक्षियों की संख्या करीब 246 है। फीजेंट्स व पक्षियों को अंडा उबालकर खिलाया जा रहा है तो भालू को शहद, रेड पांडा को दूध में प्रोटीन पाउडर (वैनीला फ्लेवर) मिलाकर दिया जा रहा है।
बांज के बीजों में उच्च कोटि की पोषक क्षमता
दूसरी ओर कुछ वन्य प्राणियों को नियमित आहार के साथ पहाड़ी बादाम विशेष रुप से खिलाये जा रहे हैं। जिसमें चीतल को 100 ग्राम, घुरल को 80 ग्राम, सांभर को 150 ग्राम, ब्लू शिप व मारखोर को 100-100 ग्राम जबकि काकड़ को 60 ग्राम, जापानी बंदर व रिसस बंदर को 30-30 ग्राम हर रोज पहाड़ी बदाम खिलाया जा रहा है।
जू के वरिष्ठ वन्य जीव चिकित्सक डा. योगेश भारद्वाज की मानें तो बांज के बीजों की पोषक क्षमता उच्च कोटि की होती है। यह बीज प्रोटीन का प्राकृतिक स्त्रोत है। 100 ग्राम बीज में 400 कैलोरी, 36 फीसदी बसा, 13 फीसदी कार्बोहाईडेट व 12 फीसदी प्रोटीन होती है।
इसके अलावा लवणों की मात्रा में कैल्सियम 4 फीसदी, पोटेशियम 10 फीसदी, आयरन 4 फीसदी, मैग्नीशियम 10 फीसदी व बिटामीन बी-6 25 फीसदी होती है। वास्तव में देखा जाए तो बांज के बीज जानवरों को ठंड से बचाने में संजीवनी का काम भी कर रहे हैं।
बादाम जमा करने का जिम्मा नरेंद्र व संदीप पर
जू में वैसे तो विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक वनस्पतियों की भरभार है जिसमें बांज भी शामिल है। 4.693 हेक्टेयर में फैले जू में बांज के करीब दर्जनों पेड़ हैं।
जू के कीपर संदीप कुमार व नरेंद्र सिंह को अन्य कामों के साथ ही हर रोज जू परिसर के साथ ही समीपवर्ती जंगलों से बांज के बीजों को जमा करने की जिम्मेदारी भी है। वन्य जीवों को खिलाने के लिए यह हर रोज दो से ढाई किग्रा बीज जमा करते हैं।