नेशनल एग्रीकल्चर कॉपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नाफेड) की सस्ती प्याज की गाड़ी अभी देरी से चल रही है। प्याज को मंडी व्यापारियों के माध्यम से सस्ते गल्ले की दुकानों से 25 रुपये किलो बेचने की योजना बनाई गई है। इसके लिए पहले एक हजार क्विंटल प्याज के 28 अगस्त तक पहुंचने की बात थी लेकिन अब इसकी पांच से सात सितंबर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, पहले के अनुभवों को देखते हुए कुछ व्यापारी इसकी गुणवत्ता के संबंध में भी आशंकित हैं।
दरअसल, कृषि मंडी में 10 दिन पहले तक प्याज के थोक भाव 50 रुपये से भी ऊपर पहुंच गए थे। इनका असर फुटकर बाजार पर भी हुआ। फुटकर बाजार में ज्यादा मुनाफा कमाने वालों ने इसे 70 रुपये और कहीं-कहीं इससे भी अधिक दाम पर बेचा। इस बीच मंडी समिति ने नाफेड के बफर स्टॉक से प्याज मंगाने की योजना पर काम किया। इसके लिए देहरादून में एक हजार क्विंटल प्याज मंगाई जानी है जिसे कुछ व्यापारियों के माध्यम से सस्ते गल्ले की दुकानों से विक्रय किया जाना है। मंडी समिति के सचिव विजय थपलियाल ने बताया कि नाफेड के अधिकारियों से वार्ता चल रही है। फिलहाल कांदा एक्सप्रेस दिल्ली तक पहुंची है। देहरादून में नाफेड के बफर स्टॉक की प्याज पांच से सात सितंबर के बीच आने की संभावना है।
बिक्री प्रक्रिया और गुणवत्ता के संबंध में आशंकित व्यापारी
नाफेड के बफर स्टॉक की प्याज से मंडी के बहुत से व्यापारी दूरी बनाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि नाफेड की जो प्याज यहां पर आती है उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है। पहले के अनुभवों के आधार पर व्यापारियों ने बताया कि कई बार प्याज बेहद छोटी होती है जिसका उन्हें वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। इसके अलावा स्टॉक में लंबे समय तक रहने से प्याज की गुणवत्ता और भी बेकार हो जाती है। बिक्री प्रक्रिया पर भी कुछ व्यापारी सहमत नहीं हैं। नाफेड की प्याज को भी बोली लगाकर बेचा जाता है। ऐसे में अधिक बोली लगाने वाले व्यापारी ही इसे खरीदते हैं। ऐसे में अधिक दाम हुआ तो न तो उन्हें फायदा होगा न जनता को ही राहत मिलेगी।
आवक कम है लेकिन प्याज का स्टॉक मौजूद, दामों में नरमी
देहरादून में इन दिनों महाराष्ट्र की लासलगांव और अन्य मंडियों से प्याज की आवक होती है। पीक समय में यहां हर दिन लगभग 10 से 12 ट्रक लगभग ढाई से तीन हजार क्विंटल प्याज की आवक होती है। वर्तमान में यहां केवल एक या दो ट्रक ही आवक हो रही है। बावजूद इसके कुछ दिनों से प्याज का उठान कम है ऐसे में मंडी में दामों में भी नरमी देखी गई है। बेहतर बुणवत्ता की प्याज 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है जो कि पहले 55 रुपये तक पहुंच गया था। मंडी सचिव विजय थपलियाल ने बताया कि इस वक्त मंडी के व्यापारियों के पास दो हजार क्विंटल तक का स्टॉक है। हाल के दिनों में उठान कम हुआ है जिससे यह स्तर बना है।
मंडी में प्याज का गणित
कृषि मंडी में अलग-अलग गुणवत्ता की प्याज की आवक होती है। कारोबारी अंकित कुमार और अनुज कुमार ने बताया कि इसके दाम भी अलग-अलग होते हैं। इसी के आधार पर वर्तमान में प्याज के मंडी में ही थोक भाव 2000 रुपये प्रति क्विंटल से 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं। इनमें आकार में बेहद छोटी प्याज को गोल्टी कहा जाता है जिसके भाव सबसे कम 2000 रुपये प्रति क्विंटल हैं। जबकि, इससे कुछ बड़ी प्याज 2500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी है जिसे गोल्टा कहा जाता है। एक दो मुंह वाली प्याज भी मंडी में बिकती है जिसे चोपड़ा कहा जाता है। इसके भाव 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक मंडी में मंगलवार को प्यापारियों को मिले हैं। जबकि, फाईन क्वालिटी की प्याज के दाम 4500 रुपये प्रति क्विंटल हैं।