राज्य आंदोलनकारी जयप्रकाश उत्तराखंडी कहते हैं कि गोलीकांड के बाद पुलिस 46 आंदोलनकारियों को बरेली सेंट्रल जेल ले गई और आंदोलनकारियों के साथ बुरा बर्ताव किया गया। उन्होंने कहा कि मसूरी में पुलिस ने जुल्म की सारी हदें पार कर दी थीं।
लोगों को घरों से उठाकर मारना-पीटना आम बात हो गई थी। कहा कि जिन सपनों के लिए राज्य की लड़ाई लड़ी गई, वो अब तक पूरे नहीं हुए हैं। पहाड़ से पलायन रोकने में सरकारें असफल रही हैं, भू-कानुन को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।
‘राज्य के विकास में किसी भी पार्टी ने नहीं किया काम’
शहीद बलवीर सिंह नेगी के बड़े भाई राजेंद्र नेगी कहते हैं कि राज्य की लड़ाई में हमने भाई को खोया, लेकिन इतने सालों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला। किसी भी पार्टी ने राज्य के विकास के लिए खास काम नहीं किया।
वहीं, राज्य आंदोलनकारी आरपी बडोनी कहते हैं कि दो सितंबर की घटना को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पुलिस के सीओ को भी शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। कहा कि उत्तराखंड की सत्ता पर काबिज रही पार्टियों ने पहाड़ को छलने और ठगने का काम किया है। पहाड़ का विकास आज भी एक सपना बना हुआ है।