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मदरसों में पीएम मोदी की तस्वीर लगाने के विरोध में उतरे मुस्लिम विद्वान, जानिए क्या बोले

Mon, 08 Jan 2018 09:42 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुड़की
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मदरसों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाने के सरकार के फैसले का मुस्लिम विद्वानों ने विरोध किया है। इनका मानना है कि उनका मजहब किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर मदरसे में लगाने की इजाजत नहीं देता। सरकार का यह फैसला शरीयत के उसूलों के खिलाफ है।

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गौरतलब है कि पिछले दिनों सरकारी मदद पाने वाले मदरसों में प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाने का आदेश पारित किया गया था। मुस्लिम संप्रदाय के विद्वानों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

लंढौरा स्थित मदरसे के प्रबंधक और जमियत-उलेमा-ए-हिंद के प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती रियासत अली ने इस तरह के फरमान को गैर वाजिब बताया। कहा कि शरीयत इस तरह की इजाजत नहीं देता।

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जानिए आगे क्या बोले

लिहाजा मदरसों में तस्वीर लगाए जाने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि इस्लाम में किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर लगाने का प्रावधान नहीं है। मुस्तफाबाद स्थित मदरसा जामिया हुसैनिया के प्रबंधक मौलवी हारून का कहना है कि मदरसों में आज तक किसी की फोटो नहीं लगाई गई।

ऐसे में सरकार को इस तरह की बाध्यता लागू नहीं की जानी चाहिए। यह आदेश उनके मजहब के खिलाफ होगा। लाठरदेवा गांव स्थित मदरसे के मुफ्ती मोहम्मद जफरुद्दीन कासमी का कहना है कि प्रधानमंत्री हमारे वजीरे आला हैं।

नेक बंदे हैं, लेकिन मदरसों में तस्वीर लगाने की बाध्यता ठीक नहीं है। इस व्यवस्था को जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए। मोहम्मद कारी शमीम का भी कहना है कि मदरसों में कोई तस्वीर कभी लगाई नहीं गई है। ऐसे में वे मुस्लिम विद्वानों के सामने इस मुद्दे को रखने के पक्ष में हैं। वे जो तय करेंगे उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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