लिहाजा मदरसों में तस्वीर लगाए जाने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि इस्लाम में किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर लगाने का प्रावधान नहीं है। मुस्तफाबाद स्थित मदरसा जामिया हुसैनिया के प्रबंधक मौलवी हारून का कहना है कि मदरसों में आज तक किसी की फोटो नहीं लगाई गई।
ऐसे में सरकार को इस तरह की बाध्यता लागू नहीं की जानी चाहिए। यह आदेश उनके मजहब के खिलाफ होगा। लाठरदेवा गांव स्थित मदरसे के मुफ्ती मोहम्मद जफरुद्दीन कासमी का कहना है कि प्रधानमंत्री हमारे वजीरे आला हैं।
नेक बंदे हैं, लेकिन मदरसों में तस्वीर लगाने की बाध्यता ठीक नहीं है। इस व्यवस्था को जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए। मोहम्मद कारी शमीम का भी कहना है कि मदरसों में कोई तस्वीर कभी लगाई नहीं गई है। ऐसे में वे मुस्लिम विद्वानों के सामने इस मुद्दे को रखने के पक्ष में हैं। वे जो तय करेंगे उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।