हो सकता है कोई यह सुनकर चौंक जाए कि डॉगी भी म्यूजिक का आनंद लेते हैं। लेकिन यह सच है। ऐसे में डॉगी पालने वालों के लिए एक चेतावनी भी है कि अगर उनके घर में म्यूजिक बज रहा है और डॉगी खामोशी से उसे इनजॉय कर रहा है तो अचानक होम थिएटर स्विच आफ न करें। डॉगी का मूड खराब हुआ तो वह काट लेगा।
काट चुका है इन्हें
क्लेमेंटाउन के रहने वाले एक निजी कंपनी में मार्केटिंग एग्जीक्युटिव विनोद कुमार के साथ यही हुआ। म्यूजिक चालू था और उनका डॉगी व्हिस्की इसे सुन रहा था। जैसे ही उन्होंने होम थिएटर स्विच ऑफ किया, विहस्की ने हाथ में काट लिया।
कुमार ने दून अस्पताल में रैबीज से बचाव के लिए इंजेक्शन लगवाए। बोले-अब इधर-उधर करके पहले डॉगी का ध्यान म्यूजिक की तरफ से हटाते हैं, फिर होम थिएटर बंद करते हैं।
और भी हैं मामले
विनोद कुमार का यह इकलौता केस नहीं है। ऐसा कई डॉगी पालने वालों के साथ हुआ है। लोगों का कहना है कि अक्सर जब उनके डॉगी का मूड खराब होता है तो गाना लगा देते हैं।
धीरे-धीरे डॉगी का गुस्सा कम हो जाता है। आशीष बिट्ठल का कहना है कि जब उनके डॉगी की तबियत खराब होती है तो वह घर में भजन के कैसेट बजाते हैं। उनका विश्वास है कि इससे डॉगी की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही घर का माहौल अच्छा हो जाता है।
डॉगी पर पड़ता है असर
कुत्तों के सीनियर सर्जन डा. कुमार कौशल का कहना है कि म्यूजिक असर डॉगी पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में बीमार कुत्तों को ठीक करने के लिए म्यूजिक थेरेपी बहुत पहले से दी जाती है। अब यहां भी इक्का-दुक्का जगह यह थेरेपी शुरू हो गई है। इसके अलावा म्यूजिक से कुत्तों के डिप्रेशन की दिक्कत भी दूर होती है।