हिमालय की गोद में स्थित रमणीय प्राकृतिक सौंदर्य एवं आध्यात्मिक ऊर्जा वाले उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थान मसूरी की गिरी कंदराओं में अब रामकथा की चौपाइयां गूंजेगी। तलगाजरडी व्यासपीठ से 31 अक्तूबर शनिवार शाम चार बजे से मुरारी बापू की 850वीं रामकथा प्रारंभ होगी।
कोरोना के संदर्भ में केंद्र सरकार और उत्तराखंड राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सीमित संख्या में ही श्रोताओं को कथा में शामिल होने की अनुमति होगी। कथा में शामिल होने वाले श्रोताओं को निमंत्रण भेजा जा चुका है। जिन लोगों को निमंत्रण नहीं मिला है उन्हें कथा में उपस्थित रहने की अनुमति नहीं होगी।
कथा के निमित्त मदनलाल पालीवाल के मुताबिक कार्यक्रम की सारी तैयारियों हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि मुरारी बापू की 800वीं कथा के निमित्त भी वही थे और 850वीं कथा के यजमान बनने का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि जो श्रोता कथा में शामिल नहीं हो सकते हैं वो निराश न हों क्योंकि 31 अक्तूबर शाम चार बजे से और एक नवंबर सुबह 9.30 बजे से इसका सीधा प्रसारण आस्था चैनल और यूट्यूब के माध्यम से भी किया जाएगा।