इसके बाद उसने सोमपाल भाटी गैंग के दो गुर्गों की हत्या की। तेजी से अपराध जगत में सिक्का जमाने के लिए चार और लोगों की हत्या कर पश्चिमी यूपी पुलिस के सिरदर्द बन गया।
इसी के साथ उसने हरिद्वार जिले में अपने पैर पसारने शुरू किए और हत्या की सुपारी लेने लगा, लेकिन वर्ष 2000 में पुलिस ने उसे हरिद्वार के कनखल की शिवपुरी कालोनी से गिरफ्तार कर लिया। उसने जेल के अंदर से अपना गिरोह सक्रिय रखा।
12 सितंबर 2011 की सुबह रुड़की जेल के बाहर बदमाशों ने डिप्टी जेलर नरेंद्र सिंह खंपा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। जिसमें कुख्यात सुनील राठी की भूमिका सामने आई और उसे षडयंत्र में शामिल होने पर आरोपी बनाया। रुड़की में हुई डिप्टी जेलर की हत्या से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
राठी पुलिस प्रशासन के लिए आतंक का पर्याय बन गया। यही नहीं इसके बाद सुनील राठी ने फिर से शार्प शूटरों के जरिए रुड़की जेल को निशाना बनाया।
जेल से छूटकर बाहर आ रहे अपने प्रतिद्वंदी कुख्यात चीनू पंडित और उसके साथियों पर गोलियां चला दी। घटना में चीनू पंडित तो बाल-बाल बच गया, लेकिन उसके तीन साथियों की मौत हो गई थी। इसके बाद चीनू पंडित ने सुनील राठी और उसकी मां राजबाला, शॉर्प शूटर कुख्यात देवपाल राणा, सुशील गुर्जर, सतीश राणा, अरविंद और सुनील राणा के खिलाफ कोतवाली गंगनहर में मुकदमा दर्ज कराया था।
इस घटना के बाद से सुनील राठी उसका नेटवर्क एक बार फिर उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया। सुनील राठी का नाम हरिद्वार और पश्चिमी उत्तरप्रदेश में यदा-कदा फिरौती, रंगदारी, हत्या के मामलों में प्रमुखता से छाने लगा।