टिहरी बांध की झील में फ्लोटिंग मरीना डूबने से हुए नुकसान के कारणों की तह तक पहुंचने के लिए प्रशासन को लंबा वक्त लग सकता है। नुकसान के आकलन के लिए मुंबई से टिहरी पहुंचे इंजीनियरों ने कहा कि झील का जलस्तर कम होने के बाद ही तकनीकी जांच शुरू की जा सकती है।
टिहरी झील में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2015 में चार करोड़ की फ्लोटिंग मरीना को झील में उतारा था, लेकिन उद्घाटन के पांच साल बाद भी मरीना का संचालन शुरू नहीं हो पाया। बीते सात मई को झील का जलस्तर कम होने पर झील किनारे खड़ी मरीना का एक हिस्सा टेढ़ा होकर डूब गया था। मरीना के डूबे हिस्से को रस्सों और लोहे के एंगिलों से बांधकर प्रशासन की टीम ने उसी दिन खड़ा कर दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पर्यटन सचिव को मरीना डूबने की जांच करने के आदेश दिए थे।
तकनीकी जांच के लिए सोमवार को मुंबई की वेस्ट कोस्ट मरीन कंपनी के इंजीनियर टिहरी पहुंचे। मंगलवार को टीम लीडर जमशेद के नेतृत्व में कोटी कालोनी पहुंची, लेकिन जलस्तर कम न होने पर वे मरीना के इंजन की जांच नहीं कर पाए। डीएम सोनिका का कहना है कि अभी झील का जलस्तर बढ़ा है। कम होने पर सही तरह से जांच हो सकती है। कंपनी के अलावा भी प्रशासन अपने स्तर से जांच में जुटा है।