अखिल भारतीय मुल्तान संगठन के अध्यक्ष महेंद्र नागपाल ने बताया कि बंटवारे से पहले साल 1911 में पाकिस्तान के मुल्तान शहर से रूपचंद नाम के एक भक्त ने भाईचारे और शांति की कामना के लिए हर की पैड़ी तक पैदल पहुंचकर गंगा में जोत अर्पित की थी। इसके बाद से लगातार ये परंपरा जारी है। रविवार शाम को शोभायात्रा निकालकर मां गंगा को जोत अर्पित की जाएगी। मुल्तान जोत महोत्सव में हर साल पंजाब, दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों के श्रद्धालु शामिल होते हैं।