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संसद में गूंजा एनआईटी उत्तराखंड का मुद्दा, सांसद तीरथ ने उठाई स्थायी परिसर निर्माण की मांग 

Wed, 10 Jul 2019 10:25 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पौड़ी
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गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड का मुद्दा पहली बार देश की संसद में गूंजा। गढ़वाल सांसद ने संसद के शून्य सत्र में एनआईटी का मामला उठाया। सांसद तीरथ सिंह रावत ने कहा एनआईटी के स्थायी परिसर का निर्माण कार्य सुमाड़ी श्रीनगर में जल्द से जल्द शुरू किया जाए। 

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प्रदेश को केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में एनआईटी की सौगात दी। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने एनआईटी की स्थापना सुमाड़ी में किए जाने की घोषणा की, लेकिन संस्थान के स्थायी परिसर का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। इसको लेकर श्रीनगर में जनता ने वर्ष 2011 में आंदोलन शुरू किया। एनआईटी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चला आंदोलन जुलाई 2013 में आमरण अनशन तक पहुंचा।

तत्कालीन प्रदेश सरकार ने आंदोलनकारियों को आनन-फानन में एनआईटी सुमाड़ी में बनाए जाने का लिखित आश्वासन दिया, लेकिन यह आश्वासन कोरा ही साबित हुआ। वर्ष 2016 में प्रगतिशील जनमंच ने एनआईटी स्थापना को लेकर एक बार फिर आंदोलन छेड़ा, जो वर्ष 2018 में उग्र होते हुए आमरण अनशन तक पहुंचा गया।

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दिसंबर 2018 को एनआईटी उत्तराखंड के 600 से अधिक छात्र-छात्राएं एनआईटी जयपुर शिफ्ट कर दिए गए। नवनिर्वाचित गढ़वाल सांसद ने एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण का मुद्दा संसद में उठाया।

सांसद तीरथ सिंह रावत ने कहा कि एनआईटी वर्ष 2009 में खुली, जिसका अस्थायी परिसर पॉलीटेक्निक श्रीनगर में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सुमाड़ी व आसपास के ग्रामीणों ने स्थायी परिसर निर्माण को 350 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई, जो संस्थान के नाम दर्ज है।

रावत ने कहा कि संस्थान के 625 छात्रों को जयपुर भेज दिया गया है, जिससे जनता में आक्रोश है, छात्रों में भविष्य को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि संस्थान के परिसर निर्माण को जमीन व धनराशि उपलब्ध है। सांसद रावत ने केंद्र सरकार व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री से स्थायी परिसर निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किए जाने की मांग की है।
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