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B'day Special: कभी कपड़े सिलकर पांच रुपये कमाती थी माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली ये बेटी

Thu, 25 May 2017 08:55 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
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bachendri pal
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माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली उत्तराखंड की बेटी बछेन्द्री पाल के बारे में कौन नहीं जानता। आज उनका जन्मद‌िन है। बछेन्द्री पाल भारत की पहली और दुनिया की पांचवी महिला हैं जिसने माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की है। तो चल‌िए हम आपको इस बहादुर बेटी के जीवन के कुछ अनछुए पल के बारे में बताते हैं।
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23 मई, 1984 के दिन बिछेन्द्री माउंट एवरेस्ट पर चढ़कर तिरंगा फहराया था। बछेंद्री उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज‌िले की रहने वाली हैं। इनका जन्म 24 मई, 1952 में हुआ था। बछेन्द्री पाल ने अपनी जिन्दगी में बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं।   बछेन्द्री पाल के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण वे लोगों के कपड़े सिलती थीं। जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उन्होंने सिलाई सीख ली और सलवार-कमीज़ सिलना शुरू कर दिया। सिलाई करके उन्हें 5-6 रुपए रोज़ के मिल जाते थे। जिससे उनका खर्च निकल आता था. स्कूल टाइम में बछेंद्री न सिर्फ पढ़ने में ही नहीं, बल्कि खेल-कूद में भी बहुत आगे रहती थी।
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इस वजह से क‌िया माउंटनियरिंग का कोर्स 

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बता दें क‌ि बछेंद्री माउंटनियरिंग में यूं ही नहीं आयी। इसके पीछे भी एक कहानी है। बी.ए. के करने के बाद बछेन्द्री ने एम.ए. (संस्कृत) किया और फिर बी.एड. की डिग्री हासिल की। इतनी पढ़ाई करने के बाद भी बछेन्द्री को कहीं अच्छी नौकरी नहीं मिली।   जहां भी नौकरी मिलने की बात होती, वहां उन्हें कम तनख्वाह वाली जूनियर लेवल की नौकरी की ऑफर दी जाती। इसलिए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया क्योंकि बछेंद्री को लगा कि ये उनकी ज्यादा पढ़ाई की तौहीन है। इसके बाद बछेन्द्री ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दाखिले के लिए आवेदन कर दिय। 

जब जमकर हुई थी बछेंद्र की धुनाई

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बताया जाता है क‌ि बछेंद्री बचपन में बहुत शरारती रही हैं। स्कूल टाइम में इनकी एक टीचर थीं, जो बहुत सुंदर थीं। बछेंद्री और इनकी सहेलियां ये सोचती थी कि उनकी टीचर इतनी सुंदर कैसे हो सकती हैं।
    उनकी सुंदरता का राज़ जानने के लिए एक दिन वो अपने दो दोस्तों के साथ स्कूल से भागकर खिड़की से उनके कमरे में घुस गईं। वो ड्रेसिंग टेबल पर देखने लगीं कि बोतलों में क्या-क्या रखा है   कि तभी उन्हें बाहर किसी के पैरों की आवाज़ सुनाई दी. वो अपने दोस्तों के साथ बेड के नीचे छिप गईं। लेकिन इस बात का पता उनकी मैम को चल गया और बछेंद्री की जम के धुनाई हुई।

इंदिरा गांधी ने कही थी एक बड़ी बात

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साल 1984 में इंदिरा गांधी ने इनकी तारीफ करते हुए कहा था, ”बछेंद्री, मै तुम्हारी जैसी सौ बछेंद्री चाहती हूं.” बछेंद्री कहती हैं कि जब मैंने उनसे कहा कि मैं एडवेंचर स्पोर्ट्स को प्रमोट करना चाहती हूं तो उन्होंने कहा कि इस काम के लिए गांव से महिलाओं को अपने साथ जोड़ सकती हो।

बछेंद्री का मानना है क‌ि म‌ह‌िलाएं क‌िसी भी क्षेत्र में पीछे नही हैं। वे हर काम कर सकती हैं। इसल‌िए अगर देश के ल‌िए आगे आना पड़े तो मह‌िलाओं को एक बार भी नहीं सोचना चाह‌िए। वे आगे आएं और तरक्की का रास्ता उन्हें खुद नजर आ जाएगा।
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ये ख‌िताब हैं इनके नाम

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भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन से पर्वतारोहण में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक (1984)[10]

पद्मश्री(1984) से सम्मानित।

उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्वर्ण पदक (1985)।

अर्जुन पुरस्कार (1986) भारत सरकार द्वारा।

कोलकाता लेडीज स्टडी ग्रुप अवार्ड (1986)।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (1990) में सूचीबद्ध।

नेशनल एडवेंचर अवार्ड भारत सरकार के द्वारा (1994)।

उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती सम्मान (1995)।

हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पी एचडी की मानद उपाधि (1997)।

संस्कृति मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार की पहला वीरांगना लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय सम्मान (2013-14)
 
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