गांव की समस्याओं के प्रति महिलाएं होती हैं ज्यादा संवेदनशील
सात हजार से ज्यादा ग्राम प्रहरी हैं इस वक्त उत्तराखंड राज्य में
ग्राम प्रहरी बनाने में महिलाओं को तरजीह दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि महिलाएं पुरुषों से ज्यादा संवेदनशील होती हैं। लिहाजा, गांवों में समस्याओं के निवारण में महिलाएं बेहतर काम कर सकती हैं। इसकी शुरुआत गढ़वाल रेंज के जिलों से की जाएगी। महिलाओं को ग्राम प्रहरी के रूप में तैनात करने के संबंध में जल्द ही एक वृहद प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
राज्य में नशा एक बड़ी समस्या है। पहाड़ के जिले भी इससे अछूते नहीं हैं। इसके अलावा भी बहुत सी समस्याएं ऐसी हैं, जिन पर समय से ध्यान दिया जाए तो इनसे आसानी से निपटा जा सकता है। ग्राम प्रहरी इन सब समस्याओं पर ध्यान देकर पुलिस को सूचनाएं देते हैं। ऐसे में महिलाएं इसमें अहम रोल अदा कर सकती हैं। महिला सशक्तीकरण को ध्यान में रखते हुए आईजी रेंज की ओर से ग्राम पहरी के तौर पर अधिक से अधिक महिलाओं को भर्ती करने की योजना बनाई जा रही है।
इसका एक प्रस्ताव भी सरकार को भेजा जाएगा। ताकि, इसकी स्थायी व्यवस्था भी की जा सके। ग्राम प्रहरी को सरकार की ओर से मानदेय भी मिलता है। आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि जल्द ही गढ़वाल के सभी जिलों में इस योजना पर काम किया जाएगा। ताकि, पुलिस अपना काम और भी कुशलता के साथ कर सके। प्रदेश में करीब सात हजार ग्राम प्रहरी हैं। इनमें बड़ा हिस्सा गढ़वाल के जिलों में है।
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ये होते हैं ग्राम प्रहरियों के कुछ काम
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Iकिसी भी घटना की जानकारी तुरंत देना।
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Iसामान्य हालात में भी हर हफ्ते थाने में गांव की जानकारी देना।
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Iअपने इलाके की पूरी जानकारी रखना।
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Iधर्मशाला या कमरे में रहने वाले संदिग्ध लोगों की जानकारी देना।
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Iनशे की बिक्री वाली जगहों की जानकारी देना।
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Iबड़े विवाद होने पर तुरंत एसएचओ को जानकारी देना।
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Iगांव में मौजूद लोगों से संपर्क करना।
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Iगांव के असामाजिक तत्वों के बारे में जानकारी देना।
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Iपारिवारिक रंजिश और अवैध खनन पर नजर रखना।I