यही कारण है कि आज वह इस मुकाम पर पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि 10 साल पूर्व मां के गुजरने के बाद बड़ी बहन संध्या ने उन्हें मां की कमी कभी महसूस नहीं होने दी। जब वह डॉक्टरी कर रहीं थी, तब उनके कुछ दोस्त यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे।
इसे देखते हुए उन्होंने भी सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी। फिर उन्हें लगा कि प्रैक्टिस के साथ पढ़ाई संभव नहीं है तो उन्होंने प्रैक्टिस छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने दो बार के प्रयास में ही सफलता हासिल कर ली। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड नेचर से भरपूर है। यहां की प्रकृति उन्हें खासा आकर्षित करती है।