वह भी खुद उनके साथ इसी कमरे में सो गया। सर्दी के कारण उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। सोमवार सुबह छह बजे जब वह उठा तो उसका सर भारी था और बेचैनी महसूस कर रहा था।
उसने अन्य परिजनों को उठाया तो उसकी मां गुड्डी देवी और तीन माह की आरुषि तो उठ गई, परंतु उसकी दीदी रूपा(सरिता) देवी और तीन साल की आरूही ने कोई हरकत नहीं की। उसने घबरा कर इसकी जानकारी अन्य परिजनों को दी, तो वे भी कमरे में पहुंचे और 108 सेवा के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल ले गए।
वहां डॉक्टरों ने रूपा देवी और आरूही को मृत घोषित कर दिया। बीमार पड़े सोबित, तीन माह की आरुषि और गुड्डी देवी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।डॉक्टर शैलेंद्र रावत ने बताया कि मां-बेटी की मौत अंगीठी के धुएं से दम घुटने के कारण हुई है।
डाक्टर ने बताया कि अंगीठी जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है, यदि कमरा बंद है तो वह आक्सीजन को खत्म कर देती है। अंगीठी वाले कमरे में ताजी हवा आती रहनी चाहिए।