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बंदरों ने दिखाई ऐसी चालाकी कि उनके आगे हार गया इंसान, पढ़ें पूरी खबर...

Wed, 02 Aug 2017 09:24 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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घायल कर देते हैं बंदर - फोटो : अमर उजाला
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यहां बंदरों ने ऐसी चालाकी दिखाई कि इंसानों को उनके आगे घुटने टेकने पड़ गए। क्या है मामला? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला बंदरों के आतंक से त्रस्त है। बंदरों को पकड़ने के‌ लिए वन विभाग के प्रशिक्षित वन कर्मियों ने पिंजरे पर भी भारी पड़ रही है।

डेढ़ साल पहले वन विभाग ने अपने कर्मचारियों को बंदर पकड़ने के लिए नैनीताल में प्रशिक्षण दिलाया था, तब यह दावा किया जा रहा था कि जल्द बंदरों के आतंक से ग्रामीणों और शहरवासियों को निजात मिल जाएगी।
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घर के अंदर से खाने का सामान उठाकर ले जाते हैं बंदर

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लेकिन अभी भी शहर हो या फिर गांव, बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। बंदर घर के अंदर से खाने का सामान उठाकर ले जाते हैं।

लोगों पर हमला करते हैं। फसलों, फलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। पिछले साल आतंकी बंदर 31 लोगों पर हमला कर चुके हैं। 

गौरतलब है कि डेढ़ साल पहले वन विभाग ने नैनीताल में अपने कर्मियों को बंदर पकड़ने का प्रशिक्षण भी दिलाया। वन विभाग की टीम नैनीताल से जिले में छह
सदस्यीय टीम प्रशिक्षण लेकर पहुंची और बंदर पकड़ में जुट गई।
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पिंजरों में कैद होना तो दूर, उसके आस-पास भी नहीं फटकते बंदर

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2015 से जिले में सबसे पहले जिला मुख्यालय की रुद्रप्रयाग रेंज और इसके बाद अगस्त्यमुनि समेत अन्य स्थानों पर बंदर पकड़ने की कवायद शुरू की गई।

पिंजरे में कुछ बंदर फंसे भी लेकिन इसके बाद एक-एक बंदर को पकड़ना वन विभाग के लिए मुश्किल हो गया। जो बंदर वन विभाग ने पकड़े भी उन्हें जंगलों में छोड़ने की बात कही, लेकिन उस विभाग पर आरोप लगने शुरू हो गए कि जिन बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जा रहा है, वही बंदर फिर से शहरों में आ गए हैं। 

वन विभाग ने जो बंदर पकड़े उन पर रंग लगाने की बात कही, जिससे उनकी पहचान की जा सके। कुछ समय तक वन विभाग ने अभियान चलाया भी, लेकिन बंदर इतने चालाक हो गए कि वह वन विभाग के लगाए गए पिंजरों में कैद होना तो दूर, उसके आस-पास भी नहीं फटकते।
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