गंगा और यमुना नदी के उद्गम वाले उत्तराखंड में लोगों को दिल्ली की तरह फ्री पानी तो मिलना तो दूर, पूरा बिल वसूलने के बावजूद जल संस्थान पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहा है।
इस समय जिले में हर रोज औसतन महज 80 लीटर पानी ही मिल पा रहा है, लेकिन जिले के कई हिस्सों में पानी की किल्लत की मार लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पाटन गांव के प्रधान राकेश पाटनी, व्यापारी विक्रम रावत, नौकरीपेशा एसएस लडवाल, सियासत से जुड़े भुवन गहतोड़ी सहित पाटी क्षेत्र में कई ऐसे लोग हैं, जो हर हफ्ते दो हजार रुपये खर्च कर प्यास बुझा रहे हैं।
चंपावत जिले में एक साल में चार करोड़ रुपये से अधिक राशि बिल के रूप में वसूलने के बावजूद लोगों को बमुश्किल 95 लीटर पानी ही मिल पा रहा है। पाटी में पानी की भारी किल्लत है। आपूर्ति एक पुरानी पेयजल योजना से हो रही है, मगर इस योजना से इन दिनों यदा-कदा पानी मिलने से लोग दूसरे स्रोतों पर आश्रित हैं।
यहां 11 परिवार ऐसे हैं, जो पानी की कमी को पूरा करने के लिए 13 किमी दूर धरौंज के स्रोत पर आश्रित हैं। एसएस लडवाल बताते हैं कि धरौंज से जीप से तीन हजार लीटर पानी लाने में दो हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। 29 मार्च से शुरू इस निजी वैकल्पिक व्यवस्था पर इन परिवारों को पानी में ही 2000 रुपये प्रति सप्ताह खर्च करना पड़ रहा है। पानी पर खर्च हो रही इस भारी-भरकम रकम की भरपाई के लिए वह दूसरे मदों में कटौती कर कर रहे हैं।
पाटी क्षेत्र की 58 योजनाओं में 55 प्रतिशत तक पानी कम हो गया है। पाटी के लिए 14 किमी दूर केदारनाथ से पुरानी पेयजल योजना है, जिससे इन दिनों 11 हजार लीटर पानी ही मिल पा रहा है, जबकि यहां दो सौ से अधिक संयोजन है। इस वजह से पानी की किल्लत हो रही है। अलबत्ता वैकल्पिक उपाय किए जाएंगे।
- चंद्रशेखर भट्ट, अपर सहायक अभियंता, जल संस्थान, पाटी
कोरा लिफ्ट पेयजल योजना से है आस
पेयजल की समस्या से जूझ रहे पाटी के लोगों के लिए कोरा लिफ्ट पेयजल योजना उम्मीद की किरण है। जल निगम के ईई एचसी भारती का कहना है कि पिछले साल 5.38 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई है। मगर एक साल बाद भी धन नहीं मिल सका। अलबत्ता 5 अप्रैल को पाटी क्षेत्र के दौरे पर आए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा पेयजल योजना के एलान से नागरिकों को जल्द काम शुरू होने की आस है।