यदि कोई वीवीआईपी चारधाम यात्रा के दौरान बदरी-केदार और दूसरे धामों के दर्शन करना चाहता है तो आम श्रद्धालु बनकर जाए क्योंकि आचार संहिता के दौरान किसी को सिक्यूरिटी नहीं दी जा सकती।
आचार संहिता की गाइडलाइन के आधार पर सीईओ ऑफिस ने राज्यपाल, सीएम व नरेंद्र मोदी तीनों को मना कर दिया है।
दरअसल, आचार संहिता लागू है और चार दिन पहले आयोग की तरफ से चारधाम के लिए भी दिशा निर्देश लागू कर दिए गए है।
मोदी ने मांगी थी अनुमति
आयोग ने स्पष्ट हिदायत दी है कि कोई मुख्यमंत्री, मंत्री या अन्य बड़ा राजनेता या संवैधानिक पद पर विराजमान किसी व्यक्ति की यात्रा के दौरान या कपाट खुलने के समय कोई सहभागिता नहीं होगी।
यदि ऐसा होता है तो इसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। पिछले दिनों भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बदरी-केदार के दर्शन करने की अनुमति चाही थी लेकिन सीईओ ऑफिस ने मना कर दिया।
हालांकि मोदी का बदरी-केदार के प्रति पुराना लगाव है, आपदा के समय वह केदारधाम का पुनर्निर्माण भी करना चाहते थे लेकिन राज्य सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी।
कुरैशी और हरीश को भी अनुमति नहीं
आयोग ने उत्तराखंड के राज्यपाल डा.अजीज कुरैशी व मुख्यमंत्री हरीश रावत के भी चारधाम में जाने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। आयोग का कहना है कि इस समय यह संभव नहीं है।
यदि किसी को जाना है तो आम श्रद्धालु बनकर अपने भरोसे जाए, राज्य इस वक्त सुरक्षा का इंतजाम नहीं कर सकता। क्योंकि इस समय सारी फोर्स चुनाव कार्यक्रम में व्यस्त है।