चुनावी फिजा के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह का संचार करने पहुंचे पर नरेन्द्र मोदी की खुमारी उन पर पूरी तरह से हावी रही। राहुल जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच ऐसे समय में आए थे जब उनके सामने करो या मरो की स्थिति है।
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पार्टी के दिग्गज एक-एक करके मोदी के शरणागत हो रहे हैं। ऐसे समय में वे राहुल से कुछ ढांढ़स और ऊर्जा की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन राहुल करो या मरो के हालातों में फंसे कार्यकर्ताओं को डरो मत का पाठ पढ़ा गए।
ऋषिकेश के गुमानीवाला स्थित डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल ग्राउंड में प्रदेशभर से पहुंचे कार्यकर्ताओं को यही कहकर जुटाया गया था कि राहुल उनसे न सिर्फ रूबरू होंगे बल्कि चुनावी टिप्स भी देंगे।
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मोदी और आरएसएस पर ही रह गया राहुल का भाषण
राहुल गांधी
- फोटो : AmarUjala
इसे कांग्रेस की ऐतिहासिक पहल बताया गया। लेकिन जब राहुल वहां पहुंचे और उन्होंने अपना भाषण शुरू किया तो आरंभ से अंत तक उसमें मोदी, भाजपा और आरएसएस की खुमारी नजर आई।
जब पीएम नरेन्द्र मोदी से लेकर उनके केंद्रीय मंत्री और अमित शाह से लेकर उनके केंद्रीय पदाधिकारी तक प्रदेश के छोटे-छोटे मुद्दों पर सत्तारुढ़ कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं, ऐसे वक्त में राहुल गांधी ने अपना भाषण मोदी और आरएसएस और नोटबंदी सरीखे मुद्दों पर केंद्रित रखा।
विचित्र संयोग था। जब युवराज गांधी के चरखे को लेकर मोदी के चरित्र के विरोधाभास को समझा रहे थे, ठीक उस वक्त उनकी पार्टी का एक ऐसा नेता जिसने आठ साल तक संगठन का नेतृत्व किया उन्हीं मोदी के शरणागत था।
आर्य के पार्टी छोड़ने से कार्यकर्ता सदमें में
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा ज्वाइन कर ली।
- फोटो : AmarUjala
कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के पार्टी छोड़ देने की खबर से समूची पार्टी सदमे में थी। चुनावी चुनौती के समय इस वरिष्ठ नेता का पलायन कर जाना पार्टी कार्यकर्ताओं को भीतर तक हिला गया।
यही वजह थी कि कार्यकर्ता मंचासीन नेताओं से जोशीले उद्बोधन की उम्मीद कर रहा था। कैबिनेट मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश ने जरूर उनकी इस उत्कंठा को कुछ हद तक बुझाने की कोशिश की। लेकिन अब आर्य गद्दार कहें जाएं या फिर कायर, ऐन चुनाव में उनके पार्टी छोड़ देने से पंडाल में जुटे कार्यकर्ताओं के मनोबल को धक्का तो लगा ही।
यही वह समय था जब शीर्ष नेताओं के ढांढस और उत्साहवर्द्धन से उसका उत्साह बढ़ता। यह अवसर पार्टी नेताओं के पास आज था भी।
राहुल ने अपने पूरे भाषण में एक भी बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भूमिका या रणनीति का जिक्र नहीं किया। उनकी ज्यादातर बातें राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में थी। उनकी भाषण से यही प्रतीत हो रहा था कि उन्हें 2017 के विस चुनाव से ज्यादा 2019 की चिंता है।
जैकेट उतारकर गर्मी दिखाई
भाषण के दौरान राहुल ने जैकेट उतारकर चुनावी फिजा में गर्माहट दिखाने की कोशिश जरूर की, मगर उनकी बातों का तारतम्य इतना टूट रहा था कि कार्यकर्ताओं से कनेक्ट नहीं हो पाया। हालांकि बीच-बीच में हाथों के इशारों और शारीरिक भाषा के जरिए वह वातावरण की नीरसता को तोड़ने की कोशिश जरूर करते दिखे।