प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण की तारीख नजदीक आ रही है और प्रदेश के पांचों सांसदों व समर्थकों की धड़कन भी बढ़ रही है।
देखने वाली बात यह है कि कैबिनेट में राज्य से पार्टी के किस सांसद बर्थ मिलेगी। जैसी चर्चा है कि 75 की उम्र पार कर चुके नेताओं को कैबिनेट से दूर रखा जाएगा, ऐसा हुआ तो कई और के रास्ते खुलेंगे।
26 मई को प्रधानमंत्री की शपथ लेने तक यह सवाल मौजूं रहेगा कि प्रदेश से निर्वाचित किस भाजपा सांसद को कैबिनेट में बर्थ मिलेगी?
खंडूड़ी का नाम है सबसे ऊपर
उत्तराखंड ने भाजपा को पांच सांसद दिए हैं, लेकिन मोदी का मिनिमम गवर्नमेंट मैक्जीमम गवर्नेंस के फार्मूले से सभी अवगत हैं।
लेकिन ऐसे हालात में भी राज्य को एक कैबिनेट मंत्री तो मिलेगा। और, यदि कुछ राहत रही तो एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री मिलना मुश्किल नहीं है।
वैसे तो पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी का नाम सबसे ऊपर है। वह पहले केंद्र में मंत्री रह चुके है। यदि उम्र का कोई फैक्टर नहीं चला तो खंडूड़ी को अवसर मिलने की ज्यादा उम्मीद है।
भगतदा को मिल सकता है संघ का साथ
सेना की शानदार पृष्ठभूमि, साफ सुथरी छवि, पौड़ी से कई बार सांसद निर्वाचित होना, प्रदेश का दो बार मुख्यमंत्री बनना, केंद्र की अटल बिहारी वाजपेई सरकार में भूतल परिवहन मंत्री के रूप में काम करने का अनुभव खंडूरी के नंबर बढ़ाता है।
लेकिन भगत सिंह कोश्यारी भी मजबूत दावेदार हैं। भगतदा खांटी संघी नेताओं में शुमार हैं, बेदाग दामन के साथ ही सूबे का मुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद, संगठन के प्रदेश अध्यक्ष, नित्यानंद स्वामी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहना और राज्यसभा की कई कमेटियों का चेयरमैन रहना उनकी दावेदारी में दम भर देता है।
यदि उम्र के मामले में खंडूड़ी खेत रहे तो भगतदा की राह खुल जाएगी। संगठन और सरकार का तजुर्बा और धुर कांग्रेसी सीट को भाजपा की झोली में डालने का इनाम भगतदा को मिल सकता है।
निशंक भी हैं दमदार
तीसरे बड़े दावेदार पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक है। वह दो साल सूबे के मुख्यमंत्री रहे, इससे पहले कई बार कैबिनेट मंत्री रहे।
यूपी के समय भी कल्याण सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उनकी राजनीतिक सक्रियता, लोगों से लगातार मिलना जुलना उनकी दावेदारी भी मजबूत करता है।
वैसे भी उन्होंने हरिद्वार संसदीय सीट पर रेणुका रावत से नहीं बल्कि सूबे की हरीश रावत सरकार के सामने चुनाव लड़कर जीत हासिल की है।