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उत्तराखंड में गंगा बेसिन के लिए तीन मॉडल

Sun, 07 Feb 2016 02:57 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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नमामि गंगे परियोजना के तहत नोडल एजेंसी वन अनुसंधान संस्थान ने गौमुख से गंगा सागर तक के लिए पौधरोपण के चार मॉडल फाइनल कर दिए हैं। इनमें तीन मॉडल उत्तराखंड के लिए हैं और एक मॉडल मैदानी क्षेत्रों के लिए है।
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इनमें प्राकृतिक भूमि, कृषि भूमि और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सब-मॉडल भी तैयार किए गए हैं। मॉडल फाइनल होने के बाद वन विभाग को इसका प्रजेंटेशन भी दे दिया गया है। गौमुख से हरिद्वार तक के लिए वन अनुसंधान संस्थान ने तीन मॉडल तैयार किए हैं। पहला मॉडल गौमुख क्षेत्र का है।

इसके लिए बर्च, पुतली, रोडोडेंट्रान आदि वृक्षों के पौधरोपण का प्रस्ताव फाइनल किया गया है। इसके बाद मध्य हिमालयी क्षेत्र में गंगा बेसिन के लिए दूसरा मॉडल है। इसमें प्रमुख पेड़ देवदार है। इसके अलावा बांज, तिलौंज, बुरांस, काफल आदि पेड़ हैं। निचले क्षेत्रों के लिए तैयार तीसरे मॉडल में बान, ओक, खासू, जांगर आदि वृक्षों को रखा गया है। चौथा मॉडल मैदानी क्षेत्रों के लिए है जो हरिद्वार के बाद लागू होगा।
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गंगा से गौमुख तक प्लांटेशन के लिए आठ हजार साइटों को लिया गया है। उत्तराखंड के तीसरे मॉडल में झिलमिल झील समेत दूसरे वेट लैंड को भी लिया गया है। इसके साथ ही गंगा और सहयोगी नदियों के किनारे कृषि के लिए उचित वृक्षों के पौधे भी लगाए जाएंगे।

नोडल एजेंसी ने गंगा बेसिन और इससे जुड़ी नदियों के बेसिन में वन्य जीव प्रबंधन, क्षमता निर्माण, जन-जागरूक ता, प्राकृतिक भूमि, कृषि भूमि तथा गंगा किनारे शहरी क्षेत्रों के लिए भी कार्ययोजना दी है। प्रमुख वन संरक्षक गढ़वाल गंभीर सिंह ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को सभी मॉडल का प्रजेंटेशन दे दिया गया है। स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट एजेंसी (एसएफडीए) से फंड सीधे जिले स्तर फॉरेस्ट डेवलपमेंट एजेंसी (एफडीए) को दिया जाएगा।
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