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मॉक ड्रिल : भूकंप से अस्पतालों में हुई क्षति, बचाव के लिए टीमें पहुंचीं

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विभागों के बीच समन्वय देखने को मिला
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भूकंप से बचाव कम करने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल में कई तरह की काल्पनिक स्थिति को उत्पन्न कर अभियान चलाने की तैयारियों को परखा गया।
माॅक ड्रिल में जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा, सीएचसी कपकोट, बीडी पांडे, चिकित्सालय नैनीताल, कोरोनेशन अस्पताल देहरादून, बेस हास्पिटल पौड़ी में क्षति हुई। जैसे ही अस्पताल प्रबंधन ने सूचना दी। उसके बाद डीईओसी ने तुरंत एसईओसी को सूचित करने के साथ ही विभागों को मैसेज दिया। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, फायर सर्विस, पुलिस, एंबुलेंस, स्वास्थ्य विभाग और आईटीबीपी की क्विक रिस्पांस यूनिट्स को अस्पताल के लिए रवाना कर दिया गया। टीम ने स्टेजिंग एरिया तैयार कर रेस्क्यू उपकरण, स्ट्रेचर, प्राथमिक उपचार सामग्री, टॉर्च, ब्रेकर मशीनें और डॉग स्क्वायड तैनात कर दिए। अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही फायर सर्विस और एसडीआरएफ की टीमों ने ‘ट्रायेज जोन’ चिह्नित किया। मलबे में फंसे मरीजों तक पहुंचने के लिए कटिंग टूल, हाइड्रोलिक स्प्रेडर और कंक्रीट ब्रेकर उपयोग में लिए गए। डॉग स्क्वायड ने मलबे के भीतर फंसे लोगों की संभावित लोकेशन चिह्नित की, जिसके आधार पर टीमें क्रमवार गैलरी बनाकर प्रवेश करती रहीं। गंभीर रूप से घायल मरीजों को रेड कैटेगरी में चिह्नित किया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर बने अस्थायी मिनी अस्पताल और हायर सेंटर भेजा गया। ध्वस्त बिल्डिंग के पास ही स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक ‘फील्ड अस्पताल’ स्थापित कर दिया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने, रास्ते साफ करने और एम्बुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह टनल- सुरंग में लोगों के फंसने, एक फैक्ट्री को नुकसान पहुंचने, और टीमों को पहुंचने, रेस्क्यू अभियान चलाने, संपर्क करने से लेकर और निकालने का अभ्यास किया गया।
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मॉक ड्रिल के दौरान कमियां भी पता चलीं
मॉक ड्रिल के दौरान कमियां भी उजागर हुई। इसमें मेडिकल पोस्ट में वैकल्पिक कम्युनिकेशन सेटअप स्थापित किया जाने की कमी को महसूस किया गया। बिजली जाने की स्थिति में जनरेटर की व्यवस्था और भूकंप जैसी आपदा एक साथ कई स्थान को प्रभावित करती है इसलिए संसाधनों को बढ़ाया जाने की बात भी महसूस की गई। पर्वतीय क्षेत्र में सड़कों का संकरा होता है, इसमें एंबुलेंस तथा अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही में परेशानी सामने आई। ट्रैफिक से भी समस्या हुई। इसके साथ ही जिला प्रशासन के लोगों को भी वायरलेस सेट इस्तेमाल करने की जानकारी होने की बात सामने आई। सचिव आपदा प्रबंधन विभाग विनोद कुमार सुमन ने कहा कि जिन उद्देश्यों को लेकर माॅक ड्रिल आयोजित की गई, उन्हें हासिल करने में सफलता प्राप्त हुई है। कुछ कमियां मिलीं हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा ताकि वास्तविक आपदा के समय किसी प्रकार की दिक्कत न आए। सभी विभाग अपने सुझाव व अनुभव को यूएसडीएमए के साथ साझा करें ताकि ड्रिल के वास्तविक अनुभव आगे की तैयारी में उपयोगी साबित हों।
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