फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: प्रदेश के सभी डिग्री कॉलेजों में मोबाइल इस्तेमाल करना होगा बैन, जैमर लगाने की भी तैयारी 

Mon, 13 Jan 2020 03:30 AM IST
अलका त्यागी आफताब अजमत,अमर उजाला, देहरादून

सार

  • उच्च शिक्षा मंत्री ने शुरू की कवायद, जल्द होगा आदेश
  • क्लासरूम में छात्र-छात्राएं नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल
  •  भविष्य में सभी कॉलेजों में जैमर लगाने पर भी विचार 
विज्ञापन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में जल्द ही मोबाइल के साथ एंट्री नहीं होगी। उच्च शिक्षा मंत्री ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। नए साल पर छात्रों के कक्षा में एकाग्रता बढ़ाने के मकसद से मोबाइल पर बैन का आदेश जल्द ही जारी होने वाला है।

विज्ञापन


उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान अमर उजाला से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि पहले भारी विरोध हुआ लेकिन अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू किया।

अब इस कड़ी में नए साल पर नया बदलाव होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही क्लासरूम में मोबाइल ले जाने पर पाबंदी लगाने जा रहे हैं। इसकी कवायद शुरू की जा चुकी है।
विज्ञापन


जल्द ही इसका आदेश जारी कर दिया जाएगा। इसके पीछे मकसद यह है कि छात्र क्लास के दौरान मोबाइल के बजाय अपनी पढ़ाई पर फोकस करें। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में जरूरत पड़ी तो वह सभी कॉलेजों में कम रेंज वाले जैमर लगाने पर भी विचार करेंगे। 

विज्ञापन

800 पद भी सृजित होंगे

प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में पढ़ाने के लिए वर्तमान में शिक्षक-छात्र अनुपात 1:42 का है। वर्तमान में प्रदेश में शिक्षकों के करीब 2200 पद निर्धारित हैं। डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस अनुपात को 1:30 करने के लिए 800 पद सृजित किए जाएंगे। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।

साइबर सिक्योरिटी की लैब भी बनेगी
प्रदेश के एनआईटी या गढ़वाल केंद्रीय विवि में साइबर सिक्योरिटी एंड इंटरनेट ऑफ थिंग्स की लैब भी बनेगी। इसके लिए उन्होंने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के सामने प्रस्ताव रखा है।

अगर इसमें कामयाबी मिलती है तो इजराइल के बाद इस तरह की यह देश की पहली और दुनिया की दूसरी लैब बन सकती है। इसमें एआईसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने अपनी सहमति दे दी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें