किशोरी ने कहा कि परिजनों ने आठ साल की उम्र में ही उसकी शादी हरियाणा निवासी 40 वर्षीय युवक से करा दी। कुछ साल ससुराल में रहने के बाद अब वह मायके में आकर रह रही है।
किशोरी ने जिलाधिकारी को बताया कि उस पर दोबारा ससुराल में जाकर रहने का दबाव बनाया जा रहा है। ससुरालवालों के साथ माता-पिता भी इस बात के लिए रोज उसको प्रताड़ित करते हैं। ऐसे में वह बहुत परेशान है।
बाल विवाह का जिक्र सुनकर जिलाधिकारी दीपक रावत और जनता मिलन में मौजूद अन्य अधिकारी भौचक्के रह गए। जिलाधिकारी ने मंगलौर पुलिस को तत्काल मामले की जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि इस बात की जांच कराई जा रही है कि क्या वास्तव में किशोरी का बाल विवाह कराया गया था। अगर ऐसा है तो परिजनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उधर, मंगलौर के कोतवाल गिरीश शर्मा का कहना है कि किशोरी पहले कोतवाली भी आ चुकी है। मामले की पहले भी जांच कराई गई, लेकिन बाल विवाह का पुख्ता प्रमाण फिलहाल नहीं मिल पाया है।
इसके अलावा एक बार किशोरी के ससुराल और मायके दोनों पक्षों के लोगों को बुलाकर पूछताछ भी की जा चुकी है। अब जिलाधिकारी के आदेश पर फिर से जांच की जाएगी।