आईआरडीटीए सभागार में मत्स्य पालक दिवस पर आयोजित कार्यकम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा
‘मंत्री जी, हम बर्बाद हो गए, बचा लीजिए। मत्स्य पालन के लिए शुरुआत में सब्सिडी दी गई, लेकिन, अब उसे बंद कर दी है। मछलियों के लिए भोजन भी नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में आमदनी तो दूर, हम बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। तालाब की जमीन पर भी कब्जा हो रहा है’। कुछ इसी अंदाज में बुधवार को मत्स्य पालन में जुटे किसानों ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के सामने हंगामा किया। जबकि, अधिकारी अपनी कमियां छिपाते हुए मान-मनौव्वल में जुटे रहे। लेकिन, किसान नहीं माने। उसके बाद मंत्री ने समस्याएं दूर करने का आश्वासन देकर किसानों को शांत किया।
सर्वे चौक स्थित ऑडिटोरियम में मत्स्य पालक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम समाप्त होने पर था। इसी बीच हरिद्वार जिले के चुड़ियाला, मोहनपुर के मत्स्य पालक विजय कुमार कश्यप ने हंगामा कर दिया। कहा कि जब उन्होंने गांव के तालाब में मत्स्य पालन की शुरुआत की थी तो वह 56 बीघा का था। अब वह 20 बीघा का रह गया है। हमें मुनाफा नहीं हो रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार को किसानों के हित में कदम उठाने चाहिए। इसी दौरान डोईवाला, दूधली से पहुंचे किसान सुरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने शुरुआत में मत्स्य पालन के लिए सब्सिडी दी, लेकिन अब नहीं दी जा रही है। मछलियों के लिए दिया जाने वाला भोजन भी बंद कर दिया गया है। ऊधमसिंह नगर से पहुंचे किसान रामप्रसाद ने कहा कि सितारगंज में अभी तक समिति नहीं बन पाई है। इसके लिए अधिकारियों से कई बार मांग की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसी वजह से वहां तालाबों का आवंटन भी क्यों नहीं हो रहा है? इस पर मत्स्य विभाग के अधिकारी किसानों को समझाते दिखे। मत्स्य पालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।